बुधवार सुबह वह फैक्ट्री आया और कमरे में बंद हो गया। बाद में फंदे पर लटक गया। साथी मजदूरों को पता चल गया। उन्होंने कमरे का गेट तोड़ा। इसके बाद शेखर को बचा लिया। सूचना पर पुलिस आ गई, उसे निजी अस्पताल में ले गई। परिजन भी आ गए।
परिजनों का कहना था कि 9500 रुपये सैलरी मिलती है। उसकी पूरी पगार कैसे कट गई? जबकि इलाज में दो इंजेक्शन और ड्रिप लगी थी। एक बेल्ट भी दी गई थी। इलाज ईएसआई कार्ड से क्यों नहीं कराया गया?
वहीं मैनेजर ने कहा कि ऑपरेटर की तबीयत खराब हो गई थी। उसका हिसाब कर दिया गया है। इंस्पेक्टर थाना सिकंदरा ने बताया कि वेतन में 10 रुपये देने पर उसने आत्महत्या का प्रयास किया था। अब हालत में सुधार है। इस मामले में किसी तरह की शिकायत नहीं की गई है।