आगरा में कीठम से भांडई के बीच तीसरी रेल लाइन का काम किसानों के विरोध के कारण तीन माह में एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सका है। इसके लिए बजट आवंटित हो चुका है। जिला प्रशासन को भूमि अधिग्रहण करना था, जिसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई, लेकिन अब किसान जमीन के मुआवजे में अंतर के मुद्दे पर रेल लाइन के निर्माण का विरोध कर रहे हैं।
आगरा-दिल्ली रेलमार्ग पर मथुरा से कीठम तक चौथी रेल लाइन का कार्य पूरा हो चुका है। इस वक्त ट्रैक को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन आगरा में ट्रेनों के सुगम संचालन और रफ्तार बढ़ाने की राह में तीसरी व चौथी लाइन के प्रस्ताव को भी गहरा झटका लगा है। मथुरा-भूतेश्वर के बीच चौथी लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन कीठम से आगे बढ़ते ही यहां अब भी दोहरी रेल लाइन है।
रेल बजट में आवंटित हुई धनराशि
आगरा में राजा की मंडी स्टेशन पर चामुंडा मंदिर प्रकरण और स्टेशन के आसपास घनी आबादी के कारण तीसरी लाइन का काम शुरू करने में बाधाएं आ रही थीं। इस कारण कीठम से भांडई तक बाईपास रेल लाइन का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। रेल बजट में इसके लिए धनराशि भी आवंटित हुई। इससे उम्मीद जागी थी कि जल्द ही काम शुरू हो जाएगा, लेकिन तीन माह बाद भी जमीन का अधिग्रहण का मसला लंबित है।
150.65 हेक्टेयर जमीन का किया जाना है अधिग्रहण
तीसरी रेल लाइन के लिए कीठम से भांडई तक 150.65 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जानी है। इसमें भांडई, इटौरा, बाईंखेड़ा, जारुआ कटरा, खेड़ा भगौर, गामरी, सहारा, मिढ़ाकुर, नानपुर, बरारा, अंगूठी, नागर, गुरेंडा, कुकथला, भिलावटी, अरसेना गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। किसान बाईपास संघर्ष समिति के संयोजक चौधरी दिलीप सिंह का कहना है कि मुआवजे की राशि में भारी अंतर, किसानों के ट्यूबवेल समेत कई मुद्दे हैं, जिन पर जिला और रेल प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। इसको लेकर 45 दिन से धरना दिया जा रहा है।
कमेटी करेगी निस्तारण
एडीएम प्रशासन अजय कुमार सिंह ने बताया कि खेतों के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण के लिए गजट भी हो चुका है। अब मुआवजे को लेकर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है, जोकि समस्या का समाधान करेगी। जल्द ही काम शुरू होगा।
जमीन अधिग्रहण किया जाना है
डीसीएम आगरा रेल मंडल प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि मथुरा से कीठम तक चौथी लाइन के काम अंतिम चरण में हैं। कीठम से भांडई के बीच तीसरी रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य आरबीएनएल (रेल विकास निगम लिमिटेड) को करना है।