आगरा में दीक्षांत समारोह के दौरान बेटियों के लगातार बेहतर प्रदर्शन पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बेटों पर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जीवनसाथी चुनते वक्त बेटियां बेटों से पूछेंगी- कितने पढ़े हो, कोई मेडल या अवॉर्ड जीता है क्या?
दीक्षांत समारोह में बीते कई वर्षों से पदक में बेटियां ही अव्वल हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इस पर बेटों पर तंज कसते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ऐसा लगता है कि आने वाले समय में पूरा हॉल बेटियों से ही भरा होगा। पदक के लिए आगे और पीछे कुर्सियों पर बेटियां ही बैठी मिलेंगी।
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राज्यपाल ने कहा कि जीवनसाथी चुनते समय बेटियां बेटों से पूछेंगी कि आप कितना पढ़े हो, कोई मेडल मिला है क्या, किसी खेलकूद-सांस्कृतिक कार्यक्रम में अवाॅर्ड जीता है क्या। सच कहती हूं, इन प्रश्नों को सुनकर बेटों के सिर झुक जाएंगे। पहले ये स्थिति बेटियों की होती थी। उन्होंने बेटियों को सीख दी कि जो आपको सम्मान दे, उसको ही जीवनसाथी चुनें। इस पर बेटियों ने जमकर तालियां बजाईं।
अभिभावकों को भी नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि मैंने एक कार्यक्रम के दौरान मेधावी की मां से पूछा क्या बेटी को घर का कार्य आता है। इस पर वो बोली- ये तो पढ़ रही है, इसे क्या जरूरत है। इस पर उन्होंने कहा कि बेटियों को पढ़ाई के साथ घर-गृहस्थी का कार्य भी आना चाहिए। क्या पता कि शादी के बाद उसकी ससुराल या फिर परिस्थितियां कैसी बनें। समारोह में कई शादीशुदा मेधावी भी आईं। इस पर राज्यपाल बोलीं कि ये अपने माता-पिता या पति के साथ आई हैं, अगर सास भी साथ आती तो बेहतर होता। इससे उनको भी पता चलता कि उनकी बहू कितनी काबिल है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मेधावियों के परिजन में कटौती न करने को भी कहा।
टॉपर में भी सबसे आगे बेटियां
मेडल पाने में ही बेटियां आगे नहीं हैं, टॉपर में भी बेटों को पछाड़ दिया है। बीते दो बार से ही छात्र टॉपर बन रहे हैं, इससे पहले एक दशक से अधिक बार बेटियां ही समारोह की टॉपर रहीं। पदक भी भरपूर पाए।