विदेशी पर्यटकों के साथ टूर ऑपरेटर मेघा सिंह
ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी। यह सब मुगलिया वैभव और इतिहास को बयां करते हैं, लेकिन असली हिंदुस्तान जहां रचता, बसता है, वह हिंदुस्तान दिखा रहीं हैं आगरा की बेटियां। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पढ़िए इन बेटियों ने कैसे लिखी कामयाबी की इबारत।
टूर ऑपरेटर जैसे क्षेत्र में जहां, पुरुषों का बोलबाला है, वहां मेघा सिंह ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि अनूठे भारत को अनुभव कराने के चलते वो विदेशी मेहमानों के लिए कल्चर एंबेसडर की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
फरीदाबाद में पढ़ाई के बाद 6 साल पहले आगरा आईं युवा मेघा ने अपने सपने को सच में तब्दील करने के लिए स्टार्ट अप किया। एनजीओ एक पहल की सदस्य रहीं मेघा आइटो ऑपरेटर के संपर्क में आईं और अपनी कंपनी आगरा वॉक शुरू की।
13 शहरों तक फैलाया कारोबार
विदेशी पर्यटकों को आगरा की गलियों में घुमाने, मंदिर, बाजार, जायके का स्वाद दिलाने जैसे असल भारत का अनुभव कराने की शुरूआत की, जो हिट साबित हुई। मेघा के साथ विदेशी पर्यटकों ने साइकिल टूर, होली की मस्ती, बालीवुड डांस को एंज्वाय किया। हर साल होली के मौके पर वह विदेशी पर्यटकों के लिए मयूर होटल कांप्लेक्स में कार्यक्रम कराती हैं।
बेहद कम उम्र में स्टार्ट अप के जरिए मेघा ने आगरा वॉक के बाद अपनी नई कंपनी बनाई, जिसे इंडियन एक्सपीरिएंसेज का नाम दिया। महज 6 साल में उन्होंने अपने इस प्रयास को देश के सात शहरों में शुरू किया है और इस साल 6 शहरों में वह विदेशी सैलानियों को भारतीय संस्कृति को अनुभव कराना शुरू कर देंगी।
संस्कृति, सभ्यता के लिए ‘गाइड’ कर रहीं प्रज्ञा
ताजमहल में विदेशी पर्यटकों के साथ प्रज्ञा सिंह
ताजमहल, आगरा किला ही नहीं, बल्कि देश के उत्तरी राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, इतिहास को विदेशी पर्यटकों के सामने बयां करती हैं महिला गाइड प्रज्ञा मित्तल। गाइड के पेशे में रहे पिता राम नरेश मित्तल से प्रेरणा पाकर प्रज्ञा ने खुद गाइड बनने का फैसला किया।
पर्यटन मंत्रालय से उत्तरी राज्यों के लिए गाइड का लाइसेंस लिया। आगरा जैसे शहर में महिला गाइडों की संख्या बेहद कम है। दुनिया के कई देशों से महिलाओं के ग्रुप महिला गाइड को प्राथमिकता देते हैं। प्रज्ञा उन्हें अपने भारतीय रंग में ऐसा रंगती हैं कि वह हिंदुस्तान के दौरे के दौरान यहां की संस्कृति में रच बस जाते हैं।
जब प्रज्ञा ने गाइड के रूप में करियर शुरू किया तो लोग उन्हें देखकर चौंकते थे। अब प्रज्ञा के बाद शहर की कई युवतियां गाइड के रूप में अपना करियर संवार रही हैं और देश की सांस्कृतिक राजदूत के तौर पर काम में जुटी हैं। प्रज्ञा का कहना है कि देश के इतिहास और संस्कृति को जाकर विदेशी अविभूत रह जाते हैं। महिलाओं के लिए यह शानदार करियर हैं, जहां उड़ान की कोई सीमा नहीं।