कासगंज। जिला की तीनों विधानसभा क्षेत्रों में मतदान के दौरान बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली आधी आबादी इस बार राजनीति के क्षितिज पर एक बार फिर से सफल हो गई। इससे पहले 2012 के चुनाव में पटियाली विधानसभा से सपा की नजीवा खान विधायक चुनी गई। इसके पहले तीन बार और महिलाएं चुनाव जीत कर विधायक बन चुकी हैं।
देश की आजादी के बाद घर का चूल्हा चौका संभालने के साथ ही राजनीति में आने का सपना आधी आबादी की आंखों में भी तैरने लगे। जिला में चार बार ऐसे मौके आए जब महिलाओं ने अपने का साबित भी किया। जिले यदि महिलाओं के राजनीति में आने के इतिहास पर नजर डाली जाए तो वर्ष 1974 से महिलाओं ने चुनाव मैदान में उतरना शुरू किया। सोरों विधान सभा से सबसे पहलेेेेेेेेे माया देवी चुनाव मैदान में उतरी, लेकिन उनकी विधायक बनने की हसरत पूरी नहीं हो सकी। उनको मात्र 328 वोट मिले और वह नौ प्रत्याशियों में अंतिम पायदान पर रहीं। जिले की सियासत में सबसे पहले 1980 के चुनाव में कांग्रेस से चुनाव मैदान में उतरी उर्मिला अग्निहोत्री ने चुनाव जीतकर जिले से महिला प्रत्याशी के रूप में प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 19489 वोट प्राप्त किए। इसके बाद 1985 में वह फिर से कांग्रेस के टिकट पर सोरों से विधायक चुनी गई। उन्होंने 32756 वोट पाकर जीत हांसिल की। इसके बाद 1991 से 2002 तक के चुनाव में 9 महिलाओं ने जिले की तीनों विधानसभाओ से किस्मत आजमाई लेकिन इनमें से जीत किसी के हाथ नहीं लगी। वर्ष 2012 के चुनाव में जिले की तीनों विधानसभाओं से 10 महिलांएं चुनाव मैदान में उतरी। इनमें से पटियाली से सपा की नजीवा खान चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची शेष 9 महिला प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 में जिले से तीन महिला चुनाव मैदान में उतरी, लेकिन कोई भी महिला चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच सकी। वर्ष 2022 के चुनाव में पटियाली से चुनाव मैदान में उतरने वाली सपा की नादिरा सुलतान 91438 वोट पाकर चुनाव जीतने में सफल हो गई। जबकि इसी विधानसभा से भारतीय शक्ति पार्टी की मीरा को 258 वोट मिले। कासगंज विधानसभा से बहुजन मुक्ति मोर्चा प्रत्याशी रूवी ने 527 वोट प्राप्त किए। जबकि अमांपुर से कांग्रेस की दिव्याशर्मा ने 1337 वोट तथा निर्दलीय ऊषा ने 156 वोट प्राप्त किए।