आगरा में कोरोना वायरस का कहर थम नहीं रहा है। सिकंदरा क्षेत्र के ईश्वर नगर में कोरोना संक्रमित महिला सिपाही की प्रसव के चार दिन बाद बुधवार दोपहर मौत हो गई। दो मई को ही उनके ससुर ने लिवर की बीमारी से दिल्ली में दम तोड़ा था। महिला सिपाही का शाम को ही ताजगंज स्थित मोक्षधाम श्मशान घाट में विद्युत दाह से अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सिपाही कानपुर के बिल्हौर थाने में तैनात थी। उनकी ससुराल आगरा के ईश्वर नगर में है। पति बीमा कंपनी में हैं। सिपाही प्रसव के लिए छुट्टी लेकर पांच अप्रैल को घर आ गई थीं। उनके देवर ने बताया कि भाभी ने दो मई को एसएन मेडिकल कॉलेज में सामान्य प्रसव से बेटी को जन्म दिया था। उन्हें अस्पताल से उसी दिन छुट्टी देकर घर भेज दिया गया था जबकि उनकी तबीयत सही नहीं थी।
24 घंटे पहले पिता की मौत हुई थी
परिजन महिला को निजी अस्पताल ले गए। वहां से कोरोना जांच की सलाह दी गई। इस पर एसएन मेडिकल कॉलेज में सैंपल दिया। मृतका के देवर ने बताया कि दो मई को ही दिल्ली में पिता का निधन हो गया। कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद शव मंगलवार को घर पहुंचा। पिता के दाह संस्कार को 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि भाभी ने एसएन मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया।
महिला सिपाही का शव घर दोपहर 12 बजे पहुंच गया था, जबकि कोरोना जांच रिपोर्ट शाम को छह बजे मिली। इसके लिए परिजनों को सीएमओ ऑफिस, एसएन मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने पड़े। परिजनों का कहना था कि इससे पहले निजी अस्पतालों के भी चक्कर काटे थे, लेकिन उपचार नहीं मिला। हर जगह कोरोना जांच रिपोर्ट मांगी गई। यह मौत के बाद आई।
रिपोर्ट आने के बाद हुआ अंतिम संस्कार
मृतक सिपाही के देवर ने बताया कि स्वास्थ्य अफसरों के निर्देश पर वे लोग पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार के लिए गए। मोक्षधाम में एक घंटा तक खड़े रहे क्योंकि वहां के कर्मचारी ने कोरोना की जांच रिपोर्ट मांगी। इसके मिलने के बाद ही अंतिम संस्कार हुआ।
चार कॉलोनियों में हड़कंप, बल्लियां लगाईं
महिला सिपाही का शव आते ही महर्षिपुरम, केआर नगर, रोशन बिहार और ईश्वर नगर में हड़कंप मच गया। महर्षिपुरम में शाम को रोज दुकान खुल रही थीं, लेकिन बुधवार को सन्नाटा पसर गया। न दुकानें खुलीं, न ही लोग घरों से बाहर निकले। पास में ही ककरैठा गांव है। यहां भी लोग घरों में ही रहे। रात आठ बजे लोगों ने महर्षिपुरम से ईश्वर नगर की तरफ जाने वाले रास्ते पर बल्लियां लगा दीं।