मैनपुरी। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए की गई पहल अब सार्थक होने जा रही है। बुधवार को कृषि विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों की मौजूदगी में महिलाओं ने मशरूम की बुवाई की। अब बस इंतजार है तो इन मुनाफे के मशरूमों के खिलने का। इससे महिलाओं को न केवल रोजगार मिलेगा बल्कि मशरूम की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
मशरूम की खेती के लिए चयनित किशनी के गांव कुरसंडा में बुधवार को कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र की टीम पहुंची। यहां पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त 11 महिलाओं के यहां टीम की देखरेख में मशरूम की बुवाई की गई। उप कृषि निदेशक डीवी सिंह के अलावा कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार, डॉ. विकास रंजन चौधरी और नरेंद्र वर्मा ने मशरूम की बुवाई कराई। उन्होंने महिलाओं को बारीकी से मशरूम की बुवाई में बरती जाने वाली सावधानियां व अन्य चीजों के बारे में बताया।
यहां ऑयस्टर मशरूम की बुवाई कराई गई है। ये मशरूम 22 से 25 दिन में तैयार होना शुरू हो जाएगा, जो 50 से 55 दिन तक चलेगा। इस बीच तीन से चार बार इसकी तुड़ाई की जाएगी। महिलाओं ने खुद अपने हाथ भूसे और कटी हुई पराली को पैकेट में भरकर बुवाई की। पहले चरण में 11 महिलाओं ने बुवाई की। इसमें गांव कुरसंडा निवासी पूनम, आशा देवी, रेखा देवी, रेनू, मिथिलेश, स्वाती, संतोषी देवी, मालती देवी, रीता, कृष्णाकांति और मनू कुमारी शामिल हैं।
तीन चरणों में दिया गया प्रशिक्षण
मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मशरूम की खेती के लिए पहल की थी। इसके लिए तीन चरणों में गांव कुरसंडा की 150 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। पहले चरण में उन्हें क्लासरूम प्रशिक्षण के बाद दूसरे चरण में सिरसागंज स्थित एक मशरूम उत्पादन फार्म पर ऑनसाइट ट्रेनिंग कराई गई। वहीं तीसरे चरण की ट्रेनिंग के लिए उन्हें कृषि विश्वविद्यालय कानपुर भेजा गया था।
- प्रशिक्षण के बाद बुधवार को कृषि विभाग के अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों ने मशरूम की बुवाई कराई है। महिलाओं को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया गया था। उम्मीद है कि उत्पादन अच्छा होगा। इसके बाद अन्य महिलाएं भी इसकी शुरुआत करेंगी। - ईशा प्रिया, सीडीओ।