आगरा। आयुष विहार (कालिंदी विहार) में शुक्रवार की दोपहर केस के सिलसिले में जांच करने पहुंचे पुलिसकर्मियों के सामने घर की पहली मंजिल से महिला संदिग्ध हालात में गिर गई। अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजन का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने मकान पर कब्जा कराने के लिए नीचे फेंक दिया। एसीपी ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है।
आयुष विहार निवासी प्रेमलता एक फैक्टरी में काम करती हैं। पति शिशुपाल एक पैर से दिव्यांग हैं। मजदूरी करते हैं, 50 वर्गगज में दोमंजिला मकान है। वह बेटे दुष्यंत और बहू नेहा के साथ रहती हैं। प्रेमलता ने बताया कि 29 जून 2024 को उन्होंने मकान का बैनामा बबली देवी के नाम किया था।
बबली देवी ने बैनामा से पहले उन्हें 1.11 लाख रुपये दिए थे। बैनामा में 7.70 लाख रुपये का चेक दर्शाया। एक दिन बबली देवी भुगतान कराने के लिए बैंक ले गईं। वहां दोनों ओर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बाद धोखे से चेक लेकर चली गई। बाद में ट्रांस यमुना थाने में 24 जून 2025 को मारपीट, गाली-गलौज, चोरी और अन्य धारा में केस दर्ज करा दिया।
शुक्रवार को वह और बेटा काम पर गए थे। घर में पति शिशुपाल और बहू नेहा थीं। दोपहर दो बजे दरोगा राजकुमार गोस्वामी पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे। आरोप है कि वो मकान खाली करने की कहने लगे। पुलिसकर्मियों के साथ दो लोग और थे। वह भी खुद को पुलिसकर्मी बता रहे थे।
नेहा के गेट बंद कर लेने पर चार पुलिसकर्मी पड़ोसी के घर की छत से घर में आ गए। घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। चिप निकाल ली। नेहा ने मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश की तो पुलिसकर्मियों ने मोबाइल छीन लिया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने नेहा को पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया। पुलिस ने पति शिशुपाल को गाड़ी में बैठा लिया। उधर, नेहा को कालिंदी विहार स्थित निजी अस्पताल ले आए। वह दो माह की गर्भवती है।
एसीपी बोले, महिला खुद गिर गई
एसीपी छत्ता पियूषकांत राय ने बताया कि पुलिसकर्मी केस के संबंध में आरोपियों के बयान दर्ज करने पहुंचे थे। डरकर महिला पहली मंजिल पर गई थी। वह खुद छत से गिर गई है। तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराई जा रही है।
ससुर की भी पिटाई का आरोप
प्रेमलता का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बहू को छत से फेंक दिया। पति शिशुपाल को पकड़कर गाड़ी में पीटा। उन्हें मकान की रकम नहीं मिली। इसके बावजूद मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। वह अपने साक्ष्य लेकर एसीपी छत्ता से लेकर अधिकारियों के कार्यालय में गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।