मुझे जलाने वालों को सजा दिलाने तक चुप नहीं बैठना, उन्होंने मुझे बहुत अपमानित किया, कोई इतना अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता, वे जालिम हैं, जालिमों को सजा दिलाकर रहना... 90 फीसदी झुलसी संगीता ने दम तोड़ने से पहले यह बयान दिया था। इसका दावा उनके पति अनिल ने किया है। अनिल का कहना है कि बयान मोबाइल में रिकॉर्ड किया है। वह पुलिस को सौंप देगा ताकि इसे जांच में शामिल किया जा सके।
अनिल ने बताया कि संगीता पंचायत से चली आई थी। उसके पीछे भरत खरे के लोग आए थे। घर जाने के दो रास्ते हैं। जिससे संगीता गई, वे उससे दूसरे रास्ते से आए। वह जब पहुंचा, तब तक संगीता को जलाया जा चुका था। वह दरवाजे पर चीख रही थी। रेत पर गिर पड़ी थी। उसने दिल्ली ले जाते समय रास्ते में चार आरोपियों के नाम बताए। इन्हें नामजद करा दिया।
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बिना जांच के गिरफ्तारी के लिए पहुंच गई थी पुलिस
अनिल ने बताया कि एससी-एसटी के मुकदमे में बिना जांच के लिए पुलिस दबिश देने के लिए पहुंच गई थी। भरत खरे ने मुकदमा छह अक्तूबर को दर्ज कराया था। मामला बच्चों के झगड़े का था। कॉलोनी के लोगों ने उससे कहा कि वह चिंता न करे, पुलिस जांच करेगी तो सच्चाई सामने आ जाएगी। लेकिन आठ अक्तूबर को पुलिस गिरफ्तारी के लिए दबिश देने पहुंच गई। वह घर पर नहीं था। पत्नी से कहा कि उसे थाने भेज दो, जेल जाएगा।