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आगरा में बंद घर में महिला की माैत: दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने दी पुलिस को सूचना, फर्श पर पड़ी थी लाश

Thu, 25 Jun 2026 11:53 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

पुलिस ने घर पहुंचकर जांच की। पता चला कि घर का दरवाजा अंदर से बंद है। इस पर वीडियोग्राफी के साथ दरवाजा तोड़ा गया। फर्श पर मकान में रहने वाली नैना तिवारी का शव पड़ा हुआ था। उनकी उम्र तकरीबन 44 साल थी।
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death demo - फोटो : iStock
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विस्तार
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आगरा के लोहामंडी के खाती पाड़ा में बृहस्पतिवार को बंद घर में महिला का शव मिला। दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस का कहना है कि शव दो से चार दिन पुराना प्रतीत हो रहा है। महिला का पति से तलाक हो गया था। वह भाई के साथ रह रही थीं। मगर वो भी डेढ़ महीने पहले कहीं चला गया, तब से उसका कोई पता नहीं है।
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एडीसीपी हिमांशु गाैरव ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह पुलिस को सूचना मिली थी कि खाती पाड़ा के एक घर से दुर्गंध आ रही है। घर पर कूड़ा उठाने के लिए सफाईकर्मी आया था। उसने पड़ोसियों को जानकारी दी। इस पर यहां रहने वाले प्रकाश शर्मा ने पुलिस को बताया। पुलिस ने घर पहुंचकर जांच की। पता चला कि घर का दरवाजा अंदर से बंद है। इस पर वीडियोग्राफी के साथ दरवाजा तोड़ा गया।

फर्श पर मकान में रहने वाली नैना तिवारी का शव पड़ा हुआ था। उनकी उम्र तकरीबन 44 साल थी। वह अपने भाई सोमनाथ तिवारी के साथ रहती थीं। मगर भाई कई दिन से घर नहीं आया था। प्रकाश शर्मा ने पुलिस को बताया कि नैना देवी का शादी के कुछ महीने बाद ही पति से तलाक हो गया था।
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उनकी मां देव कुमारी की पहले ही माैत हो गई थी। मामा विनोद बिहारी नगर निगम में सेनेटरी इंस्पेक्टर थे। उन्होंने बहन को अपना मकान दे दिया था। उनकी भी डेढ़ साल पहले मृत्यु हो गई। तब से नैना अपने भाई के साथ रहती थीं। पुलिस का कहना है कि भाई के आने का इंतजार किया जा रहा है। मृत्यु की वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

पहले भी मिले हैं शव
पूर्व में शाहगंज के अर्जुन नगर क्षेत्र में मां-बेटी के शव घर में मिले थे। इसी तरह साकेत काॅलोनी मार्ग पर एक कोठी में अकेले रहने वाले व्यक्ति का शव मिला था। जगदीशपुरा और नाई की मंडी में भी शव मिल चुके हैं। इस तरह की घटनाओं के बाद घर में अकेले रहने वाले बुजुर्ग और महिलाओं की जानकारी के लिए ऑपरेशन सवेरा शुरू किया गया था। थाने में रजिस्टर बनाए गए। इसके लिए बीट सिपाही को लगाया गया था। मगर यह अभियान सिर्फ खानापूर्ति ही बनकर रह गया।







 
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