मैनपुरी में पांच साल पहले नाबालिग छात्रा को भगाने के दोषी मिले मां-बेटी को एफटीसी प्रथम अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई है। 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। दोनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।
बताया गया है कि मैनपुरी के थाना बरनाहल के एक गांव की रहने वाली एक किशोरी वर्ष 2012 में कक्षा नौ की छात्रा थी। पांच दिसंबर की रात वह घर पर थी। तभी गांव का ही रहने वाला एक किशोर गांव में रहने वाली अपनी बुआ अनीता और उसकी बेटी की मदद से उसे बहला फुसलाकर ले गया।
तलाश के बाद पता नहीं चलने पर किशोरी के बाबा ने सात दिसंबर को तीनों के खिलाफ थाना बरनाहल में रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने किशोरी को बरामद करके नौ दिसंबर 2012 को उसका मेडिकल कराया।
किशोरी ने तीनों के खिलाफ दी गवाही
14 दिसंबर 2012 को किशोरी का मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया गया। किशोरी ने तीनों के खिलाफ मजिस्ट्रेट के समक्ष गवाही दी। पुलिस ने जांच में दोषी पाकर तीनों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।
मामले की सुनवाई एफटीसी प्रथम के जज आनंद कुमार सिंह की अदालत में की गयी। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता सहित छह गवाह पेश किए गए। एफटीसी जज ने मां-बेटी को दोषी पाते हुए उनको पांच पांच साल की सजा सुनाई गई है। दोनों को 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पीड़िता को दिए जाएंगे 20 हजार रुपये
एफटीसी जज ने निर्णय में लिखा है पीड़िता किशोरी को 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। जुर्माने की धनराशि में से शेष 10 हजार रुपये सरकारी कोष में जमा किए जाएंगे। अगर पीड़िता को पहले सहायता मिल चुकी है तो उसको रुपये नहीं दिए जाएंगे।
वहीं किशोरी को भगाने का आरोपी भी नाबालिग है। गवाही के दौरान आरोपी के नाबालिग होने की बात सामने आने पर उसकी फाइल सुनवाई के लिए किशोर अदालत में भेजी गयी है। पीड़िता ने आरोपी पर दुष्कर्म करने का आरोप भी लगाया है। जबकि मां-बेटी पर किशोरी को केवल भगाने का आरोप है।