लूट और माल बरामदगी के मामले में घटना के 12 साल बाद वादी अपने पूर्व बयानों से अदालत में मुकर गया। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावी क्षेत्र विकास गोयल ने ठोस साक्ष्य के अभाव में जिला एटा के गांव बंधा निवासी आरोपी मनोज यादव को बरी करने के आदेश दे दिए।
थाना जगदीशपुरा में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार इकरार ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 21 जनवरी 2014 को वह अपने ट्रक में जयपुर राजस्थान से तूड़ी भरकर मुरादाबाद ले जा रहा था। रात करीब 9:30 बजे मघटई गांव के पास बाइक लेकर खड़े दो युवकों ने ट्रक को रोकने का इशारा दिया। रोकने पर रुकने पर दोनों युवक केबिन के अंदर आ गए। उन्होंने नगर निगम की 100 रुपये की रसीद दी। बदले में एक हजार रुपयों की मांग करने लगे।
विरोध पर मारपीट कर जेब में रखे 1550 रुपये लूट लिए। क्लीनर के शोर मचाने पर दोनों भाग गए। उन्होंने और क्लीनर ने पीछा कर अन्य लोगों मदद से आरोपी मनोज यादव को मौके से पकड़ लिया। उसकी जेब से 1550 रुपये बरामद कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी का दूसरा साथी मौके से फरार हो गया था। अभियोजन पक्ष उक्त मुकदमे में वादी और दरोगा कृष्ण पाल सिंह की ही गवाही दर्ज करा सका। वादी अपनी पूर्व गवाही से मुकर गया।