पहले जिला पंचायत अध्यक्ष, फिर ब्लाक प्रमुख और अब एमएलसी की सीट पर सपा की जीत तय मानी जा रही है। सपा प्रत्याशी को पटखनी देने के लिए 27 उम्मीदवारों ने पर्चा लिया था लेकिन मैदान में अब सपा के खिलाफ एक मात्र प्रत्याशी है लेकिन यह भी बेहद कमजोर माना जा रहा है। नामांकन पत्रों की जांच मंगलवार को और नाम वापसी की प्रक्रिया बुधवार को होगी।
सपा प्रत्याशी दिलीप यादव के खिलाफ 27 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र लिए थे। इनमें बहुजन समाज पार्टी के नेता पूर्व मंत्री नारायण सिंह सुमन के बेटे और वर्तमान एमएलसी वीरू सुमन के छोटे भाई अवधेश सुमन भी शामिल थे लेकिन अवधेश सुमन ने ऐन मौके पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। भाजपा ने टीपी सिंह को प्रत्याशी बनाया था लेकिन सोमवार को तय समय (दोपहर तीन बजे) तक वह पर्चा दाखिल नहीं कर पाए।
अन्य प्रत्याशियों में से महज एक हसनू राम अंबेडकरी का नामांकन दाखिल हो चुका है। चर्चा है कि हसनूराम अब मैदान से पीछे हटने की तैयारी में हैं। चर्चा ये भी है कि नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने प्रस्तावकों को एआरओ के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया था लेकिन जांच के दौरान प्रस्तावकों को बुलाया जाएगा। ऐसे में 10 प्रस्तावक लाना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। इस आधार पर पर्चा खारिज होने की संभावना है। अगर वह इस चरण से आगे बढ़ भी गए तो समाजवादी नेताओं के साथ डील भी हो सकती है, ताकि सपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो जाए। ऐसे में सपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि आगरा-फीरोजाबाद एमएलसी सीट पर डा. दिलीप यादव का निर्विरोध निर्वाचन तय है।