यमुना किनारे प्रतिबंधित डूब क्षेत्र में चिह्नित 59 अवैध निर्माणों पर कभी भी बुल्डोजर चल सकता है। इनको ढहाने की कार्रवाई पर अमल के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इन्हीं निर्माण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अपनी गर्दन फंसने से बचाने के लिए विभिन्न विभागों ने तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में किसी भी दिन पुलिस-प्रशासन की निगरानी में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) का बुल्डोजर डूब क्षेत्र में हुए निर्माणों पर चल सकता है।
यमुना नदी की दुर्दशा पर एनजीटी की नोटिस के बाद प्रशासनिक हलके में हड़कंप है। प्रशासन को जांच रिपोर्ट के साथ 26 मई को जवाब दाखिल करना है। सोमवार शाम मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर, जिलाधिकारी पंकज कुमार, एडीए वीसी मनीषा त्रिघाटिया, नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह, एडीए सचिव प्रभांशु श्रीवास्तव के साथ यमुना की दुर्दशा देखने निकले। दौरा मनोहपुर से प्रारंभ हुआ। नदी में कूड़ा देखकर मंडलायुक्त खासे नाराज हुए। इसके बाद अफसरों ने दयालबाग के पोइया घाट में हुए अवैध निर्माणाें का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां बने गणपति अपार्टमेंट, मंगलम शिला, पुष्पांजलि सीजन आदि आवासीय योजनाओं को यमुना नदी की ओर से देखा। यमुना किनारे हुए अवैध निर्माणों पर मंथन हुआ।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2013 में एडीए, सिंचाई विभाग एवं राजस्व विभाग की टीम द्वारा संयुक्त रूप से चिह्नित किए गए 59 अवैध निर्माणों को ढहाने का निर्णय लिया गया है। चूंकि एक साथ इतने निर्माण ढहाना आसान नहीं है इसलिए एडीए कई चरणों में यह कार्रवाई की जाएगी। बता दें, सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति के सदस्य डीके जोशी ने पिछले दिनों एनजीटी में यमुना को उसके मूलस्वरूप में लाने के लिए याचिका दायर की थी। इसी की सुनवाई के बाद एनजीटी ने अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
यमुना के डूब क्षेत्र में स्थित अवैध निर्माण हर हालत में ढहाए जाएंगे। बाकी निर्माणों की वैद्यता की भी जांच होगी। मैंने संबंधित अधिकारियों से तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा है।
- पंकज कुमार, जिलाधिकारी