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आगरा: रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर कोबरा देख सहमे लोग, वाइल्डलाइफ एसओएस ने किया रेस्क्यू

Thu, 27 Jan 2022 05:19 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

वाइल्डलाइफ एसओएस एनजीओ ने कीठम रेलवे स्टेशन और एक महाविद्यालय से कोबरा सांपों का रेस्क्यू किया है। 
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रेस्क्यू टीम ने पकड़ा कोबरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के कीठम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर गुरुवार को रेलवे ट्रैक के समीप जहरीले कोबरा सांप को देख वहां मौजूद लोगों के बीच दहशत का माहौल पैदा हो गया। स्टेशन अधीक्षक ने तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस को हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दी। वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट तुरंत मौके पर पहुंची और सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया।

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एक अन्य घटना में वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट ने आगरा के कराहरा स्थित श्री श्याम महाविद्यालय से पांच फीट लंबे कोबरा को पकड़कर जंगल में छोड़ा। कोबरा महाविद्यालय के गेट के समीप मैदान में था। दोनों सांपों को कुछ देर निगरानी में रखने के बाद वापस जंगल में छोड़ दिया गया।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हमारी टीम इस तरह के रेस्क्यू ऑपरेशन को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित है। हम लोगों के प्रयासों की सराहना करते हैं, जो वक़्त रहते हमें ऐसी किसी भी घटना की सूचना देते हैं। जिसके फलस्वरूप रेस्क्यू टीम इन संकटग्रस्त जंगली जीवों को रेस्क्यू कर वापस जंगल में छोड़ देती है।

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इसलिए निकल रहे सांप  
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़र्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा कि सर्दी के मौसम में सांप अक्सर गर्म स्थानों की तलाश में जंगल से बाहर निकलते हैं। सांपों के शरीर का तापमान पर्यावरण के साथ बदलता रहता है, इसलिए यदि वे बहुत गर्म या बहुत ठंडे हो जाते हैं। आगरा में पिछले कुछ दिनों से बादल छाए रहे और लंबे अंतराल के बाद धूप निकली। इसलिए सांप गर्म स्थानों पर पहुंच रहे हैं। 

कीठम रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक प्रमोद कुमार ने कहा कि वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने पहले भी स्टेशन परिसर से सांपों को बचाया है। इस बार भी सांप को देखते ही हमने तुरंत उनसे संपर्क किया। रेस्क्यू टीम सांप को पकड़कर ले गई। 

यहां पाए जाते हैं कोबरा
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि भारतीय कोबरा 6,600 फीट से अधिक ऊंचाई और अत्यधिक रेगिस्तान को छोड़कर पूरे भारत में खुले जंगलों, मैदानों, कृषि भूमि, चट्टानी इलाकों, आर्द्रभूमि और यहां तक कि घनी आबादी वाली बस्तियों में पाए जाते हैं। भारतीय कोबरा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित हैं।
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