न्यू आगरा के सुरेश नगर में सोमवार को कोठी नंबर दस बी में नौ घंटों तक शांत रहे तेंदुए ने लोहे के पिंजरे में जाते ही तेवर बदल लिए। कीठम स्थित भालू संरक्षण केंद्र में वह जोर से गुर्रा रहा है। मंगलवार सुबह उसे खाना लेकर पहुंचे कर्मचारी कुलदीप पर उसने पिंजरे से अंदर से ही पंजे से हमला कर दिया। कुलदीप घायल हो गया। उसके हाथ में छह टांके लगाए गए हैं। तेंदुए के अक्रामक तेवर देख उसे विशेष पिंजरे में रखा गया है। बीअर रेस्क्यू टीम उसके पास जाने में घबरा रही है। हमले के बाद उसे दूर से भोजन दिया जा रहा है।
उसका दिमाग ठंडा रखने के लिए उसके लिए कूलर की ठंडी हवा में रखा गया है। सोमवार रात कीठम पहुंचते ही उसे नहलाया गया। इसके बाद मंगलवार सुबह स्नान कराया गया। उसे स्वादिष्ट भोजन दिया जा रहा है। लेकिन उसका गुस्सा शांत नहीं हो रहा। वह रात भर गुर्राता रहा। सुबह उठते ही दहाड़ने लगा। उसके पास कोई कर्मचारी जाता है, तो उस पर पिंजरे के अंदर से ही हमले की कोशिश करता है।
भालू संरक्षण केंद्र चलाने वाले वाइल्ड लाइफ एनजीओ एसओएस का कर्मचारी कुलदीप सुबह साढ़े सात बजे उसके लिए भोजन लेकर गया था। तेंदुआ पिंजरे में था। कुलदीप जैसे ही नजदीक पहुंचा, उसने गुर्राते हुए पंजा मार दिया।
उसे सुरेश नगर से ट्रेंकुलाइज करके पकड़ा गया था। इसके बाद उसे जैसे ही होश आया, संभालना भारी हो गया। इसे सीधे कीठम स्थित बीअर रेस्क्यू सेंटर में लगाया गया। यहां पहुंचने से पहले वह होश में आ गया था। इसके बाद तो उसे एनीमल एंबुलेंस से उतरना मुश्किल हो गया। जिस पिंजरे में उसे कैद करके लाया गया था, उस पिंजरे को छूने पर ही वह दहाड़े मारने लगा था। साथ ही पिंजरे को तोड़ने का प्रयास करने लगा। बड़ी मुश्किल से एंबुलेंस से उसे पिंजरे सहित उतारा गया। वन्य जीव के गुस्से को देखते हुए रेस्क्यू टीम ने उसे दूसरे मजबूत छह बाई चार मीटर के के पिंजरे में बंद करना कर दिया।
बीअर रेस्क्यू सेंटर के पिछले हिस्से में उसे रखा गया है। रेस्क्यू सेंटर के कर्मचारी भी उसके पास जाने से कतरा रहे हैं। हालांकि उसके गुस्से को ठंडा करने के लिए रात को ही उसे नहलाया गया था। इसके बाद सुबह भी उस पर पानी डाला गया। तेंदुए की देखरेख कर रहे डा. इलैया राजा का कहना है कि गुस्से में होने की वजह से वह रात में ठीक से सो नहीं सका। सुबह भी जल्दी उठ गया। हालांकि उसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है लेकिन उस पर काबू कर पाना मुश्किल हो रहा है।
सोमवार रात से मंगलवार दोपहर तक उसे तीन बार मांस खिलाया जा चुका है। बताया जा रहा है कि तेंदुए को कीठम में लाते वक्त रास्ते में उसे चौथी बार भी ट्रेंकुलाइज करना पड़ा था, इतनी हेवी डोज पर भी वह आधा घंटे बाद ही होश में आ गया था।
खूंखार भालू के लिए तैयार किया गया था यह पिंजरा
रेस्क्यू सेंटर के कर्मचारियों का कहना है कि जिस पिंजरे में तेंदुए को रखा गया है, वह पिछले एक दशक पहले एक खूंखार भालू के लिए तैयार करवाया गया था। दरअसल, जिस सामान्य पिंजरे में उस भालू को रखा गया था, उसे उसने तोड़ दिया था। इसके बाद यह सख्त पिंजरा बनवाया गया था। तेंदुए के आक्रोश को देखते हुए उसे इसी पिंजरे में रखना उचित समझा गया, नहीं तो वह अन्य जीवों के साथ-साथ सेंटर के कर्मचारियों को भी नुकसान पहुंचा सकता था।