चढ़ावे के फूलों की सबसे पहले सफाई जैसे धागा व अन्य कूड़ा करकट निकलने और छंटाई का काम आश्रय सदन की माताएं करती हैं। उसके बाद फूलों को सुखाया जाता है और फिर पीसकर उनका पाउडर तैयार कर होली पर हर्बल गुलाल तैयार किया जाता है। इस बार इन फूलों से चार-पांच कुंतल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
सावित्री देवी ने बताया कि हम पहले फूलों को छांटते हैं, फिर उन्हें सुखाते हैं, सब का अलग-अलग काम है। सुखाने के बाद इसे पीसकर छानते हैं, इसमें कोई मिलावट नहीं करते, पूरी तरह से प्राकृतिक रहता है। इसे बनाने में बहुत अच्छा लगता है।
आशा सागर ने कहा कि हमारी बेरंग जीवन में यह रंग नया उत्साह और उमंग लेकर आते हैं। गुलाल बनाने के दौरान हमारा समय भी व्यतीत हो जाता है और काम भी पूरा हो जाता है।
महिलाओं को मिलती है सरकारी पेंशन
प्रोबेशन अधिकारी अनुराग श्याम रस्तोगी ने कहा कि वृंदावन स्थित चैतन्य विहार के महिला आश्रय सदन की वृद्ध माताओं को सरकार की ओर से पेंशन तो मिलती ही है लेकिन गुलाल बनाने के बदले इन माताओं को इनके काम के समय के मुताबिक मेहनताना भी दिया जाता है। इन दिनों गुलाल बनाने के काम में वे अपनी सुविधा और समय के अनुसार ही काम करती हैं। समय के हिसाब से उन्हें बाकायदा इसके लिए पारिश्रमिक भी दिया जाता है।