प्रेमानंद महाराज के शिष्य ने की खुदकुशी
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एक ऐसा असहनीय दर्द जिसे झेल पाना हर किसी के बस की बात नहीं। सोचने भर से जहां बदन में सिहरन दौड़ उठे....तो वहीं मथुरा में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण ने किसी चाकू से नहीं बल्कि ग्राइंडर से अपना प्राइवेट पार्ट काटा और फिर छत से कूदकर जान दे दी। पुलिस की जांच का सबसे ज्यादा फोकस इसी पर है कि आखिर रसिक के सीने में ऐसा कौन सा राज था जिसके खुलने के डर से रसिक ने यह कदम उठाया।
शांत, सुरम्य और आध्यात्मिक वातावरण में साधना करने की इच्छा से वृंदावन आए इस 25 वर्षीय नौजवान का यह हश्र होगा, किसी ने सोचा भी न होगा। रसिक दुलारी ने अपनी जान देकर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के सामने भी बड़ी चुनौती है। कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या कारण था कि रसिक ने अपनी जान दे दी। प्राइवेट पार्ट क्यों काटा वह भी ग्राइंडर के जरिए बेहद दर्दनाक तरीके से।
रसिक जिस कमरे में रहते थे उसमें एक और साधक भी उनके साथ रहते थे। पुलिस इस साधक से भी पूछताछ करेगी कि आखिर रसिक के जीवन में ऐसा क्या चल रहा था कि यह कदम उठाना पड़ गया। मां बाप से संपर्क तो थे नहीं।
ऐसे में साथी ही परिवार की तरह थे। यहां से पुलिस को बड़ी लीड सकती है। यह भी जांच का मुख्य विषय है कि क्या किसी ने रसिक को यह कदम उठाने के लिए विवश किया या फिर उकसाया। यदि ऐसा है तो आखिर वह कौन है और क्यों ऐसा किया।
एक महिला के ऊपर गिरते-गिरते बचे
जिस समय रसिक छत से गिरे, वहीं नीचे सड़क पर एक महिला गुजर रही थी। बस वह जरा सा आगे निकली और रसिक सड़क पर आ गिरे। महिला बाल बाल बची। यदि रसिक उनके ऊपर गिर जाते तो उनकी जान को भी खतरा हो सकता था।
दर्द न हो, इसके लिए कोई पदार्थ तो नहीं लिया
वीडियो फुटेज में दिख रहा कि प्राइवेट पार्ट काटने के बाद रसिक ने छत से कूदकर जान दी। वह कमरे से ऊपर छत पर आए। कुछ देर बैठे और फिर कूदे। इस दौरान यह महसूस हो रहा है कि वह दर्द से नहीं तड़प रहे हैं। प्राइवेट पार्ट कटने के बावजूद।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण अत्यधिक रक्तस्राव और विभिन्न हड्डियां टूटना है। पुलिस का मानना है कि शायद रसिक ने कुछ ऐसा पदार्थ ग्रहण किया है जिससे उन्हें दर्द का अहसास नहीं हो रहा है। इसके लिए ब्लड सैंपल को प्रयोगशाला में भेजा गया है।
एसएसपी श्लोक कुमार कहते हैं कि इस पूरे मामले मे कई अहम सवाल हैं। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है। इससे जुड़े सभी लोगों से इस बाबत पूछताछ की जाएगी और हर एंगल को परखा जाएगा।
आश्रम की छत से कूदकर संत प्रेमानंद महाराज के साधक ने दी जान
मथुरा के वृंदावन के वराह घाट मार्ग पर गऊ कृपा कुंज आश्रम की छत से कूदकर संत प्रेमानंद महाराज के साधक (परिकर) ने जान दे दी। छत से नीचे गिरने के बाद अन्य साधक उन्हें अस्पताल लेकर गए लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। साधक का प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आश्रम पर जांच के लिए पहुंच गई। जांच के दौरान पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया।
पुलिस के अनुसार, वराह घाट के पास गऊ कृपा कुंज के नाम से आश्रम हैं। यहां संत प्रेमानंद महाराज के करीब 40- 50 साधक रहते हैं। चार मंजिल के इस कुंज में रहकर साधक राधारानी की उपासना कर रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे आश्रम की चौथी मंजिल से एक साधक ने छलांग लगा दी। आश्रम से करीब छह फुट की दूरी पर वह सड़क पर गिरे। उनके गिरते ही अफरा तफरी मच गई।
उनकी पहचान जबलपुर के रहने वाले 25 वर्षीय दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारीशरण के रूप में हुई। आश्रम में रहने वाले अन्य साधक तुरंत ही गाड़ी से उन्हें अस्पताल लेकर भागे। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। साधक की धोती कमर से नीचे खून से लथपथ हो रही थी और उनके मुंह से खून निकल रहा था। चिकित्सकों ने जांच की तो देखा उनका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ है।
सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने साधक के शव को पोस्टमार्टम गृह पर भेजा और जांच के लिए आश्रम पहुंच गई। थाना पुलिस की सूचना एसपी सिटी राजीव सिंह और सीओ वृंदावन संदीप सिंह भी पहुंच गए। एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि साधक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की जांच स्पष्ट हो जाएगी।
2025 से रहे थे जबलपुर के दीपक
संत प्रेमानंद महाराज को गुरु मानकर उनको अनुसरण करने के लिए 2025 में जबलपुर के दीपक वृंदावन आए। यहां आने के बाद वह यहां का ही होकर रहे गए। संत से दीक्षा लेने के बाद वह आश्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग करने लगे तो वह अन्य साधकों के साथ रहने लगे।
कुछ समय पहले ही हुआ था निर्माण
गऊ कृपा कुंज आश्रम का निर्माण कुछ समय पहले ही हुआ था। चार मंजिल के इस आश्रम में छत पर सोलर प्लांट लगा हुआ है और नीचे के तल पर कमरे बने हुए हैं। कमरों में साधक रहते हैं। गली में दो दर्जन से अधिक आश्रम बने हुए हैं। पुलिस को जानकारी मिली है कि आश्रम करीब दो माह पूर्व ही शुरू हुआ है।