गर्दन फंसते ही बदले कॉलेज संचालकों के बयान
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डा. बीआरए यूनिवर्सिटी के जाली मार्कशीट प्रकरण में बुरी तरह फंसे 84 कॉलेज संचालकों के बयान बदल गए हैं। एसआईटी में बयान दर्ज कराने वाले 33 संचालकों ने एक सुर में कहा है कि उन्होंने बीएड में कोटे से अधिक दाखिले तत्कालीन वीसी एएस कुकला के निर्देश पर किए थे। इससे पहले इन्होंने कहा था कि उन्होंने कोटे से अधिक एडमिशन नहीं किए। दरअसल, कुकला का निधन हो चुका है। माना जा रहा है कि इसीलिए इन्होंने नया पैंतरा चला है। इन्हें मालूम है कि इनके कुकला से पूछताछ होना संभव नहीं रहा। 2004 से 2009 के बीच बीएड में हुए इस फर्जीवाड़े में कुल 25 हजार छात्रों को जाली मार्कशीट बेची गई थी। कॉलेज संचालकों ने मैनेजमेंट कोटा अपनी मर्जी से बढ़ाकर ज्यादा दाखिले किए। फिर जाली मार्कशीट थमा दी। एसआईटी ने केस दर्ज करने के बाद सभी 84 कॉलेज संचालकों को पहले नोटिस दिया था। इसके जवाब में सभी ने कहा कि उन्होंने कोटे से अधिक दाखिले नहीं दिए। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले 10 दिन में एसआईटी ने अपने लखनऊ स्थित ऑफिस में 33 संचालकों के बयान दर्ज किए हैं। सभी तत्कालीन वीसी अवतार सिंह कुकला के एक आदेश की कॉपी लेकर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि इस आदेश के तहत ही दाखिले किए गए थे। कुकला का निधन हो जाने के चलते एसआईटी इस आदेश के बारे में अब तत्कालीन रजिस्ट्रार शिवपूजन सिंह से सवाल जवाब करेगी।
दो लिपिकों के घर कुर्की वारंट चस्पा
एसआईटी ने जाली मार्कशीट प्रकरण में फरार चल रहे छह लिपिकों में से दो के घर कुर्की पूर्व वारंट चस्पा कर दिया है। ये हैं शैलेंद्र और सुनील वार्ष्णेय। दोनों 2004 में बीएड सेक्शन में तैनात थे। दोनों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी कई बार दबिश दे चुकी है। उनके घर पर ताला लटका है।