मैनपुरी। गेहूं की सरकारी खरीद की अंतिम तारीख 22 जून तक बढ़ाई गई है। वहीं केंद्रों पर वारदाना नहीं होने से किसान गेहूं बेचने के लिए परेशान हैं। खरीद केंद्रों के बाहर गेहूं केे लदे ट्रैक्टर लेकर किसान चार-पांच दिन से इंतजार कर रहे हैं। वहीं किसान नेता गेहूं खरीद की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं हैं।
खरीद केंद्रों पर चार पांच दिनों से बारदाना नहीं है। गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करा चुके किसान परेशान हैं। उनके गेहूं की खरीद नहीं हो पा रही है। गेहूं बेचने के लिए किसान केंद्रों के बाहर ही इंतजार कर रहे हैं। मुख्यालय सहित कस्बों में बनाए गए सरकारी खरीद केंद्रों का एक जैसा ही हाल है। किसान कहीं केंद्र के बाहर तो कहीं अंदर गेहूं से लदे अपने ट्रैक्टर खड़े करके खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। बुधवार को भी कई सरकारी खरीद केंद्रों पर बारदाना नहीं होने से गेहूं की सरकारी खरीद नहीं हुई।
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सरकार किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदना चाहती है। बारदाना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। बारदाना नहीं होने से खरीद केंद्रों पर पहुंचने वाले किसान मजबूरी में आढ़तियों को अपना गेहूं बेचते हैं। सरकार की योजना का लाभ मनमानी के चलते किसानों को नहीं मिल पाता है।
राधेश्याम शाक्य, अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन
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सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं कम तौलने के साथ ही तुलाई के नाम पर किसानों का शोषण हो रहा है। बारदाना नहीं होने की बात कहकर किसानों को लौटाकर व्यापारियों का गेहूं खरीदा जा रहा है। शिकायत पर अधिकारी कार्रवाई तो दूर सुनवाई तक नहीं करते हैं। संगठन किसानों के हित में आंदोलन करेगा।
अनिरुद्ध दुबे, अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (किसान)
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खरीद केंद्र प्रभारियों की मंाग पर बुधवार को खरीद केंद्रों पर बारदाना भेजा गया है। बारदाना की कमी से गेहूं की सरकारी खरीद प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
उदित नारायण सिंह, खाद्य विपणन अधिकारी