मंडी में आढ़तों पर सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक दाम पर गेहूं बिक रहा है। सरकारी केंद्रों पर 2015 रुपये प्रति क्विंटल के रेट हैं, तो वहीं आढ़तों पर 2070 के आसपास गेहूं की खरीद की जा रही है।
सरकारी गेहूं खरीद एक अप्रैल से शुरू हो चुकी है। इसके लिए 2015 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया गया है, जबकि मंडी में निजी आढ़तों पर 2070 कि दाम में गेहूं खरीदा जा रहा है। ऐसे में किसानों का रुझान सरकारी केंद्रों की ओर होता नहीं दिख रहा है।
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किसानों को उनकी फसल का वाजिब मूल्य मिल सके इसके लिए जिले में एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हो गई है, जहां 2015 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीद निर्धारित की गई है। बीते वर्ष के सापेक्ष 40 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दाम बढ़ाए गए हैं, लेकिन मंडी में शासन द्वारा जो मूल्य का निर्धारण किया गया है, उससे 55 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से आढ़ती अधिक दामों पर गेहूं खरीद रहे हैं।
ऐसे में किसान क्रय केंद्रों पर जाने से बच रहे हैं। खरीद शुरू हुए दो दिन हो गए हैं, लेकिन क्रय केंद्र पर एक भी किसान गेहूं लेकर नहीं पहुंचा है। जिला विपणन अधिकारी नंद किशोर ने बताया कि अभी खेतों से गेहूं निकलकर नहीं आया है। किसानों से संपर्क कर उन्हें सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए जागरूक किया जाएगा।
किसान बोले, कम है सरकारी मूल्य
किसान मुकेश निवासी कुसाड़ी ने बताया कि क्रय केंद्र से अधिक दामों में आढ़तियों द्वारा गेहूं खरीदा जा रहा है। सरकार ने जो मूल्य का निर्धारण किया है वो कम है। इसलिए मंडी की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं मानपुर के रहने वाले किसान आशीष कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा जो मूल्य निर्धारित किया गया है वह बहुत कम है। डीजल और खाद पर लगातार पैसे बढ़ रहे हैं। ऐसे में क्रय केंद्रों पर फसल का वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा है।