इस चुनावी समर में सपा-रालोद गठबंधन के लिए पश्चिम बेल्ट सबसे अहम है। पहले चरण में यहां 58 सीटों पर 10 फरवरी को मतदान है। पिछले चुनाव में सपा-रालोद को यहां तीन सीटें मिलीं थीं। जबकि 14 सीटों पर प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। 24 सीटें ऐसी थीं जहां गठबंधन को तीसरा स्थान मिला था।
2012 विधानसभा चुनाव में सपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। तब पहले चरण की 58 सीटों में 19 सीटों पर सपा और रालोद गठबंधन को सफलता मिली थी, लेकिन पांच साल में ही समीकरण बदल गए। आगरा, अलीगढ़, मथुरा में भाजपा को 22 में 21 सीटें मिलीं। 11 जिलों की कुल 58 में 53 सीटों पर कमल खिला था। पश्चिम से ही पूरब में लखनऊ तक का रास्ता भगवा खेमे ने तय किया।
2022 में नई हवा का नारा लेकर आई सपा और किसानवादी रालोद इस क्षेत्र में खोई राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। अखिलेश जयंत की जोड़ी से सियासी तापमान गर्म है। उधर, भाजपा ने अपने अभेद्य किले की मजबूती के लिए सूरमाओं की फौज हर मोर्चे पर लगा रखी है। पहले चरण की 58 में 20 सीटों पर पिछड़ों व अल्पसंख्यकों का प्रभाव है। वहीं, आगरा और अलीगढ़ की 16 सीटों में आठ सीटें जाट बहुल हैं।