आवास विकास कालोनी के सभी 16 सेक्टरों में पेयजल की भीषण किल्लत है। क्षेत्र में कई माह ये गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है। लोगों का कहना है कि इस पानी की पीना तो दूर कपड़े धोने के काम भी नहीं लाया जा सकता है। जलकल विभाग में कई बार शिकायतें की गई पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
आवास विकास परिषद की सिकंदरा आवासीय योजना को 2006 में नगर निगम और जलकल विभाग के हैंडओवर किया था। यहां पानी की सप्लाई सिकंदरा वाटर वर्क्स से की जाती है। यहां एमबीबीआर प्लांट होने के बावजूद गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। साथ ही सुबह-शाम की सप्लाई भी नियमित नहीं है। क्षेत्र में पानी सप्लाई को पानी की छह टंकियां और चार जोनल पंपिंग स्टेशन (जेडपीएस) बने हैं। चार टंकियां बंद पड़ी हैं। दो जेडपीएस काम नहीं कर रहे।
इनबाक्स...
पानी के लिए तीन तरफा खर्च
आवास विकास कालोनी की जनता को पानी की लिए तीन तरफा खर्च करना पड़ता है। एक तो जलकल विभाग को पानी और सीवर का बिल अदा करना होता है। विभाग ने अधिकांश घरों की रिकवरी जारी कर रखी है। दूसरे अनियमित और गंदे पानी की समस्या के चलते अधिकांश घरों के बाहर सबमर्सिबल पंप लगी हैं। इसको चलाने के लिए बिजली का खर्च वहन करना पड़ता है। चूंकि भूगर्भ जल खारी है और इसमें टीडीएस की मात्रा अधिक है। इस कारण पानी पीने लायक नहीं है, जिसके चलते आरओ प्लांट से 20 लीटर की बोतल खरीदनी पड़ती है। एक सामान्य घर में औसतन दो से चार पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही हैं।
क्या कहती है क्षेत्र की जनता
सिकंदरा वाटर वर्क्स में एमबीबीआर प्लांट लगा है। इससे शोधित पानी आम वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की अपेक्षा बेहतर होता है लेकिन लाइन लीकेज होने से गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है। कभी-कभी तो सीवर का पानी आता है। ऐसे में जलकल विभाग कनेक्शन ही काट दे।
कपिल वाजपेयी, पूर्व पार्षद
वाटर वर्क्स का पानी पीने योग्य नहीं है। पिछले कई माह से सप्लाई का यही हाल है। घरों में आरओ वाटर की बोतलों से काम चल रहा है। न तो अधिकारी सुनते हैं और ना ही नेता। हर आदमी के पास तो इतना पैसा नहीं है कि वह आरओ वाटर खरीद कर पिये।
सपना सजनानी, क्षेत्रीय निवासी
गंदे पानी की समस्या केवल आवास विकास कालोनी में नहीं है। शहर के अन्य हिस्से के लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। जलकल विभाग के अधिकारी केवल बिल भेजना जानते हैं। जनता को किस परेशानी से जूझना पड़ा है, इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है।
हेमंत परिहार, क्षेत्रीय निवासी
इस पानी को पीना तो दूर इससे नहाया भी नहीं जा सकता है। नहाने से त्वचा रोग हो जाता हैं। कभी-कभी एसिड पानी जैसा आता है। झाग बन जाते हैं। कपड़े धोने में प्रयोग करे तो कपड़ों के रंग खराब हो जाते हैं। गर्मियों में तो पानी की समस्या और भी विकराल हो जाती है।
रेखा गुप्ता, क्षेत्रीय निवासी
पानी सुबह आ जाता है तो शाम को नहीं आता है। शाम को आ जाए तो सुबह का पता नहीं है। पानी की क्वालिटी क्या है यह किसी से छुपा नहीं है। आवास विकास में तमाम सेक्टर ऐसे हैं जहां निम्न आय और मध्यम आय वर्ग के लोग रहते हैं वे लोग पानी की व्यवस्था कहां से करें।
अशोक कुमार, क्षेत्रीय निवासी