प्रदेश के तीन हजार सहायक अध्यापकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। कारण है, मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में आया सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला जिसमें 3,800 डाक्टरों की डिग्री निरस्त कर दी गई। शिक्षकों की नौकरी इसलिए खतरे में पड़ी क्योंकि इनकी बीएड की डिग्री को फर्जी बताया गया है। इन सभी की डिग्री डा. बीआरए यूनिवर्सिटी की है। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में रख चुकी है। कभी भी फैसला आ सकता है।
मामला बीएड सत्र 2004-05 का है। आठ हजार अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। एसआईटी ने लंबी जांच पड़ताल के बाद 5132 की डिग्री को फर्जी करार दिया। इनमें से तीन हजार डिग्रीधारक सहायक अध्यापक के रूप में नौकरी कर रहे हैं।
एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने रख चुकी है। जांच भी हाईकोर्ट के आदेश पर हुई है। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट विवि. प्रबंधन को भी दे दी थी। लेकिन फैसला इसलिए नहीं हो पा रहा था क्योंकि संख्या बहुत बड़ी है। अब व्यापमं केस में फैसला आ जाने केबाद एसआईटी की नजर हाईकोर्ट पर लगी है। उधर विवि. प्रबंधन को भी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।
इसी सप्ताह आएगी एसआईटी
आगरा।
केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फर्जी डिग्री प्रकरण में जांच को आगे बढ़ाने के लिए लखनऊ से एसआईटी इसी सप्ताह फिर से यूनिवर्सिटी आएगी। अब उन कालेजों पर कार्रवाई की तैयारी है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर बीएड के 2004-05 सत्र में दाखिले दिए थे। ऐसे 84 कालेज बताए गए हैं। इस मामले में आठ केस पहले से दर्ज हैं।