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पानी को तरस रहे मंडी के किसान

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02एमएनपी-07-नवीन मंडी में खराब पड़ा हैंडपंप - फोटो : MAINPURI
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फोटो-4 से 12 तक
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हाईलाइर्ट्स
-5000 किसान प्रतिदिन पहुंचते हैं मंडी
-500 से अधिक हैं मंडी में आढ़ती
-500 के करीब खरीद के लिए आते हैं व्यापारी
-12 हैं नवीन मंडी में हैंडपंप
-04 हैं नवीन मंडी में वाटर कूलर
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नवीन मंडी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे किसान और आढ़ती
खराब पड़े हैं हैंडपंप और वॉटर कूलर, मौसम गर्म होने के साथ ही बढ़ी समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
मैनपुरी। नवीन मंडी से भले ही प्रशासन को हर साल करोड़ों का राजस्व मिलता है, लेकिन यहां बूंद-बूंद पानी के लिए किसान तरस रहे हैं। गर्मी शुरू होते ही ये समस्या और भी विकराल होने लगी है। कई हैंडपंप तो खराब हो चुके हैं तो किसी का हत्था गायब है या चोरी हो गया है। वॉटर कूलर भी ताले में बंद है। किसान बोतल खरीदकर पानी पीते हैं।
शहर के आगरा रोड स्थित नवीन मंडी में रोजाना औसतन छह हजार लोग आते हैं। लगभग एक किलोमीटर के दायरे में फैली मंडी में प्यास बुझाने के लिए लगाए गए हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। इसके चलते जब भी किसानों और आढ़तियों को प्यास लगती है तो उन्हें मंडी के बाहर बनी दुकानों से पानी की बोतल खरीदकर पीनी पड़ती है। आढ़तियों पर तो इसका कोई खास असर नहीं पड़ता है, लेकिन मंडी आने वाले किसानों को अपनी मेहनत की कमाई पानी पर खर्च करनी पड़ती है।
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जैसे-जैसे मौसम में बदलाव हो रहा है, पानी की समस्या और भी विकराल होती जा रही है। क्योंकि तेज धूप में पानी के लिए किसान और आढ़ती तरस रहे हैं। इसके अलावा ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए चार वाटर कूलर भी बंद पड़े हुए हैं। आखिर मंडी प्रशासन कब इस समस्या से निदान के लिए ध्यान देगा।
कैंपर हो जाते हैं खाली
आढ़ती अपनी दुकानों पर 20 लीटर पानी का कैंपर मंगाते हैं लेकिन किसानों की अधिक आवक के चलते गर्मियों में ये कैंपर एक घंटे भी नहीं चलता है। इसके बाद किसानों को प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
प्रदीप कुमार मंडी सचिव से दो टूक
सवाल: नवीन मंडी में पेयजल के लिए क्या व्यवस्थाएं हैं और इनकी वर्तमान में क्या स्थिति है।
जवाब: नवीन मंडी में 12 हैंडपंप और चार वाटर कूलर हैं। वाटर कूलर वर्तमान में बंद हैं, लेकिन हैंडपंप अधिकांश चालू हैं।
सवाल: वाटर कूलर क्यों संचालित नहीं किए जा रहे हैं।
जवाब: नवीन मंडी में लगभग चार दशक पहले टंकी बनी थी, इसकी लाइन खराब होने के कारण वाटर कूलर नहीं चल रहे हैं। जल्द ही पाइपलाइन की मरम्मत के बाद से चालू कराया जाएगा।
सवाल: खराब हैंडपंप के लिए मंडी प्रशासन क्या कर रहा है।
जवाब: माह के अंत तक खराब पड़े हैंडपंप को सही कराने के साथ ही आठ नए हैंडपंप भी लगवाए जाएंगे। इसके लिए स्वीकृति मिल गई है।
मैनपुरी। नवीन मंडी से भले ही प्रशासन को हर साल करोड़ों का राजस्व मिलता है, लेकिन यहां बूंद-बूंद पानी के लिए किसान तरस रहे हैं। गर्मी शुरू होते ही ये समस्या और भी विकराल होने लगी है। कई हैंडपंप तो खराब हो चुके हैं तो किसी का हत्था गायब है या चोरी हो गया है। वॉटर कूलर भी ताले में बंद है। किसान बोतल खरीदकर पानी पीते हैं।
शहर के आगरा रोड स्थित नवीन मंडी में रोजाना औसतन छह हजार लोग आते हैं। लगभग एक किलोमीटर के दायरे में फैली मंडी में प्यास बुझाने के लिए लगाए गए हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। इसके चलते जब भी किसानों और आढ़तियों को प्यास लगती है तो उन्हें मंडी के बाहर बनी दुकानों से पानी की बोतल खरीदकर पीनी पड़ती है। आढ़तियों पर तो इसका कोई खास असर नहीं पड़ता है, लेकिन मंडी आने वाले किसानों को अपनी मेहनत की कमाई पानी पर खर्च करनी पड़ती है।
जैसे-जैसे मौसम में बदलाव हो रहा है, पानी की समस्या और भी विकराल होती जा रही है। क्योंकि तेज धूप में पानी के लिए किसान और आढ़ती तरस रहे हैं। इसके अलावा ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए चार वाटर कूलर भी बंद पड़े हुए हैं। आखिर मंडी प्रशासन कब इस समस्या से निदान के लिए ध्यान देगा।
आढ़ती अपनी दुकानों पर 20 लीटर पानी का कैंपर मंगाते हैं लेकिन किसानों की अधिक आवक के चलते गर्मियों में ये कैंपर एक घंटे भी नहीं चलता है। इसके बाद किसानों को प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
प्रदीप कुमार मंडी सचिव से दो टूक
सवाल: नवीन मंडी में पेयजल के लिए क्या व्यवस्थाएं हैं और इनकी वर्तमान में क्या स्थिति है।
जवाब: नवीन मंडी में 12 हैंडपंप और चार वाटर कूलर हैं। वाटर कूलर वर्तमान में बंद हैं, लेकिन हैंडपंप अधिकांश चालू हैं।
सवाल: वाटर कूलर क्यों संचालित नहीं किए जा रहे हैं।
जवाब: नवीन मंडी में लगभग चार दशक पहले टंकी बनी थी, इसकी लाइन खराब होने के कारण वाटर कूलर नहीं चल रहे हैं। जल्द ही पाइपलाइन की मरम्मत के बाद से चालू कराया जाएगा।
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सवाल: खराब हैंडपंप के लिए मंडी प्रशासन क्या कर रहा है।
जवाब: माह के अंत तक खराब पड़े हैंडपंप को सही कराने के साथ ही आठ नए हैंडपंप भी लगवाए जाएंगे। इसके लिए स्वीकृति मिल गई है।
नवीन मंडी में हजारों किसान आते हैं। इन्हें पीने के लिए कम से कम पानी तो मिल जाए, लेकिन न तो मंडी समिति हैंडपंप सही कराती है और न ही आढ़ती ध्यान देते हैं।
बृजनंदन, आढ़ती।
गर्मियों में पानी के बिना एक कदम चलना भी मुश्किल होता है। तेज धूप में जब मंडी में पानी नहीं मिलता है तो लोगों को परेशानी होती है।
जितेंद्र सिंह, आढ़ती।
मंडी में अगर पानी नहीं मिलता है तो बोतल खरीदने के लिए बाहर जाना पड़ता है। इससे किसानों को नुकसान होता है। इस पर ध्यान देना चाहिए।
दिलीप कुमार, किसान।
किसानों की फसल मंडी में खुली पड़ी रहती है। ऐसे में वो मंडी के गेट तक पानी लेने भी नहीं जा पाते हैं। किसानों के लिए सभी हैंडपंप सही होने चाहिए।
रामसनेही, किसान।
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