कासगंज की कालीनदी (नदी के पानी की शुद्धता की उम्मीद जगी वाली खबर के साथ)
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कासगंज। औद्योगिक इकाइयों और शहरों का कचरा ढोती काली नदी की तस्वीर अब बदलने की तैयारी की जा रही है। जनवरी माह में प्रयागराज में प्रस्तावित माघ मेले की तैयारियों के तहत काली नदी के पानी को भी शुद्ध करना योजना में शामिल है। इससे नदी के जल के शुद्ध होेने की उम्मीद जगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने नदी के पानी की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है।
भले ही जिले की किसी औद्योगिक इकाई का गंदा पानी काली नदी में न जाता हो, लेकिन अलीगढ़, बुलंदशहर की इकाइयों के सीवरेज के कारण कासगंज में नदी में जलीय प्रदूषण रहता है। प्रयागराज में जनवरी में लगने वाले माघ मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने संगम तट पर पहुंचेंगे। कन्नौज के बाद गंगा नदी में काली नदी की धारा मिल जाती है। शासन स्तर से पीसीबी को निर्देश मिले हैं कि गंगा में गिरने वाली काली नदी की धारा को किसी तरह निर्मल किया जाए। इसके लिए संभावनाएं तलाशें। पीसीबी ने अब मॉनिटरिंग शुरू की है।
असंतोषजनक थी रिपोर्ट
पिछले दिनों काली नदी में हजारों मृत मछलियां बहती हुई देखी गई थीं। उस समय पीसीबी ने पानी की जांच कराई तो पाया कि डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन की मात्रा न्यूनतम 5 से घटकर 2 रह गई थी। जबकि बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा न्यूनतम 2 से बढ़कर अधिकतम 12 पहुंच गई थी।
- कालीनदी के पानी को किस तरह शुद्ध किया जाए, इसमें ऑक्सीजन की मात्रा कैसे संतुलित बनी रहे। इसकी मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। जनवरी माह में प्रयागराज में माघ मेला है। कालीनदी की धार गंगा नदी में गिरती है। इसलिए निर्देश मिले हैं कि अभी से मॉनिटरिंग कर पानी को शुद्ध किया जाए।
- रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।