आगरा में गंगा दशहरा पर भी यमुना प्यासी रही। नदी में अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ा गया। गोकुल बैराज से आगरा के लिए 850 क्यूसेक के सापेक्ष 777 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ। ताजमहल के पार्श्व में और हाथी घाट पर यमुना नदी सूखी पड़ी रही। जहां नदी गहरी थी, वहीं पानी दिखाई दिया। इन्हीं जगहों पर श्रद्धालुओं ने गंगा दशहरा पर डुबकी लगाई।
नदी की क्षमता एक लाख क्यूसेक से अधिक है। पोइया घाट से हाथी घाट तक यमुना का फांट 250 से 400 मीटर तक चौड़ा है। नदी में गिरने वाले नालों के कारण नदी दूषित हो रही है। पर्याप्त पानी नहीं होने से यमुना की तलहटी रेत के मैदान में तब्दील हो गई है। यमुना में पानी नहीं होने से यमुना भक्तों की भावनाएं भी आहत हैं।
रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि यमुना में पानी नहीं होने से यमुना भक्तों में नाराजगी है। विरोध में शुक्रवार को गंगा दशहरा पर रेत स्नान होगा। एत्माउद्दौला व्यू प्वाइंट पर रेत से यमुना भक्त स्नान कर शासन व प्रशासन को उनके वादे याद दिलाएंगे। यमुना में पानी छोड़ने की मांग करेंगे।
मथुराधीश मंदिर के महंत जुगल श्रोतिया ने बताया कि जो नदी पूरे शहर की प्यास बुझाती थी, वह खुद आज प्यासी है। जीवनदायिनी नदी दम तोड़ रही है। इसके विरोध में यमुना सत्याग्रह किया जाएगा। यमुना का पुराना गौरव लौटाने के लिए आंदोलन करेंगे।
सपा पार्षद दल के नेता राहुल चौधरी ने बताया कि शासन और प्रशासन की लापरवाही से यमुना की यह दुर्दशा हुई है। पांच साल में सरकार ने कुछ नहीं किया। यमुना में पानी की जगह कीचड़ व गंदगी बहती है। स्नान तो दूर पानी आचमन लायक नहीं रह गया है।
यमुना भक्त गोविंद खुराना ने बताया कि आगरा में सत्तारूढ़ दल के तीन मंत्री, एक केंद्रीय मंत्री, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष सहित 30 से अधिक जनप्रतिनिधि हैं, परंतु यमुना के प्रति बिल्कुल संवेदनशील नहीं हैं। नेताओं से अब कोई उम्मीद नहीं रही।