आगरा के यमुनापार क्षेत्र में पानी के संकट को देखते हुए रिसाव, आपूर्ति में कमी, ट्रिपिंग आदि की समस्याओं पर निगरानी के लिए स्काडा सिस्टम लगाया जाएगा। जलकल विभाग ने नाई की सराय स्थित ट्यूबवेल योजना में इसे लगाने का निर्णय लिया है।
शनिवार को जलकल महाप्रबंधक अरुणेंद्र कुमार राजपूत ने नाई की सराय स्थित जलाशय और ट्यूबवेल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने अतिरिक्त सुपरवाइजर की तैनाती की है। 33 करोड़ रुपये की लागत से 2015-17 में तैयार किए गए यमुनापार के नाई की सराय ट्यूबवेल योजना में 16 ट्यूबवेल से जलापूर्ति की जा रही है।
टेढ़ी बगिया क्षेत्र की ओर टेल तक पानी न पहुंचने के कारण लोगों के आक्रोश को देखते हुए महाप्रबंधक ने सभी इंजीनियरों के साथ बैठक की और शनिवार सुबह निरीक्षण किया। उन्होंने स्काडा सिस्टम से नाई की सराय को लैस करने के निर्देश दिए, ताकि पल-पल की रिपोर्ट आती रहे।
इससे ट्यूबवेल से पानी की कमी, खराबी, लाइन में लीकेज आदि समस्याओं को तत्काल देखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर पाइपलाइन नहीं है, वहां टैंकरों के जरिए जलापूर्ति कराई जाए। टैंकर से पानी भेजने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
क्या है स्काडा सिस्टम
स्काडा यानी सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन एक व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली है जो विभिन्न उद्योगों में उपयोग होती है, जैसे कि ऊर्जा, पानी, परिवहन, और विनिर्माण। यह प्रणाली वास्तविक समय में डेटा एकत्र करके, विभिन्न उपकरणों और प्रक्रियाओं की निगरानी करके, और फिर उस डेटा का उपयोग करके आवश्यक कार्यों को नियंत्रित करके काम करती है।