आगरा के छावनी क्षेत्र में पानी की किल्लत बनी हुई है। पिछले महीने तीन जर्जर टंकियां ध्वस्त किए जाने के बाद 43 हजार लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। हालत यह है कि नलों से कब पानी आएगा, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। कई बार महज 10 मिनट के लिए आपूर्ति होती है और कई दिन पानी का दबाव इतना कम रहता है कि एक बाल्टी भरने में घंटों लग जाते हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद छावनी परिषद समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर सकी है। मजबूरी में लोगों को पानी खरीदकर घर चलाना पड़ रहा है।
तीन टंकियां हटने के बाद वार्ड-1 के नई बस्ती, चार रहट, बालूगंज और वाल्मीकि बस्ती सहित तीन वार्डों में जलापूर्ति छोटे-छोटे अंडरग्राउंड टैंकों के सहारे की जा रही है। ये टैंक भी जर्जर हैं और लगातार रिसाव होने से पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह बच्चे स्कूल और कामकाजी लोग कार्यालय निकल जाते हैं, उसके बाद पानी छोड़ा जाता है। ऐसे में अधिकांश परिवारों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
वार्ड-1 की नई बस्ती निवासी रफीक ने मुख्य अधिशासी अधिकारी को शिकायत पत्र देकर नियमित जलापूर्ति, गंगाजल आपूर्ति बहाल करने और नई पानी की टंकी के निर्माण की मांग की है। चार रहट, बालूगंज निवासी पूर्व पार्षद पुत्र परमजीत ने बताया कि बमुश्किल 20 से 35 लीटर पानी मिल पाता है। तभी आपूर्ति बंद हो जाती है। स्नेहा बघेल ने बताया कि पानी की टंकी तोड़े जाने के बाद से रोजाना केवल 20 से 25 लीटर पानी ही मिल रहा है। सदर क्षेत्र के वार्ड-3 के पार्षद प्रेमचंद्र गुप्ता ने कहा कि जलापूर्ति तो 11 बजे के बाद ही होती है। पानी आने का कोई समय निर्धारित नहीं है। वहीं क्षेत्रीय निवासी रिंकी सिंह का कहना है कि पानी का प्रेशर इतना कम रहता है कि एक बाल्टी भरने में काफी समय लग जाते है। क्षेत्रीय निवासी मुकेश ने बताया कि पानी की आपूर्ति बहुत कम हो रही है। पानी मोल खरीदना पड़ रहा है।