गत सत्रों में हुई गड़बड़ियों से डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की अभी तक किरकिरी हो रही है। फर्जी प्रमाणपत्र के सत्यापन के मामले में इंदौर (मध्यप्रदेश) कोर्ट से विश्वविद्यालय के एक पूर्व अधिकारी और वर्तमान में सेवाएं दे रहे एक अधिकारी और लिपिक के खिलाफ वारंट जारी किया गया है।
इससे पहले बीएड की फर्जी मार्कशीट प्रकरण में लिपिक हरीश कसाना के गैर-जमानती वारंट किए जा चुके हैं। उसके खिलाफ कुर्की की तैयारी चल रही है। इंदौर पुलिस वारंट लेकर विश्वविद्यालय पहुंची थी।
संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में जानकारी हासिल की। सूत्रों की माने तो करीब पांच वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश में लेखपाल भर्ती हुई थी। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्र लगाए थे।