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आगरा विविः 2 अधिकारी व लिपिक पर लटकी कार्रवाई की तलवार, ये है मामला

Wed, 07 Feb 2018 05:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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गत सत्रों में हुई गड़बड़ियों से डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की अभी तक किरकिरी हो रही है। फर्जी प्रमाणपत्र के सत्यापन के मामले में इंदौर (मध्यप्रदेश) कोर्ट से विश्वविद्यालय के एक पूर्व अधिकारी और वर्तमान में सेवाएं दे रहे एक अधिकारी और लिपिक के खिलाफ वारंट जारी किया गया है। 
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इससे पहले बीएड की फर्जी मार्कशीट प्रकरण में लिपिक हरीश कसाना के गैर-जमानती वारंट किए जा चुके हैं। उसके खिलाफ कुर्की की तैयारी चल रही है। इंदौर पुलिस वारंट लेकर विश्वविद्यालय पहुंची थी। 

संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में जानकारी हासिल की। सूत्रों की माने तो करीब पांच वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश में लेखपाल भर्ती हुई थी। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्र लगाए थे। 
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इसमें से कई चयनित हो गए। बाद में संबंधित के प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय में सत्यापन के लिए भेजे गए। सत्यापन में प्रमाणपत्र ठीक बताया गया। शिकायत पर फिर हुई तो जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। 

इसी मामले में विश्वविद्यालय तत्कालीन तैनात दो अधिकारियों और एक लिपिक को वारंट जारी किया गया है। जिनके खिलाफ वारंट जारी किया गया है। उसमें विवि के पूर्व कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी, पूर्व उप कुलसचिव रामव्रत राम और लिपिक सर्वजीत कौर का नाम शामिल है। 

प्रभाष द्विवेदी वर्तमान में संपूर्णानंद विवि वाराणसी में तैनात हैं। रामव्रत राम सेवानिवृत्ति होने के बाद भी विवि में सेवाएं दे रहे हैं। सर्वजीत कौर खंदारी परिसर में तैनात हैं। 28 फरवरी को सेवानिवृत्त होना है। 

विवि के पीआरओ डा. गिरजाशंकर शर्मा का कहना है कि कोर्ट में मामला चल रहा था। कोई निर्णय होने पर विश्वविद्यालय में वर्तमान में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विधि संगत कार्रवाई की जाएगी। 
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