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वार्ड दस की री-काउंटिंग पर सामने आया प्रशासन का ‘झूठ’

Sat, 21 Nov 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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जिला पंचायत के वार्ड 10 की वोटों की दो बार री-काउंटिंग कराने के मामले में जिला प्रशासन का झूठ सामने आ गया है। प्रशासन अभी तक दावा कर रहा था कि इसके लिए चुनाव आयोग से मौखिक आदेश लिया गया था। लेकिन राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने साफ कर दिया कि आयोग से लिखित या मौखिक कोई आदेश नहीं लिया गया था। उनका तो यहां तक कहना है कि आयोग से इस तरह मौखिक आदेश दिया ही नहीं जाता है। उनके इस बयान से प्रशासन के आला अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है।
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वार्ड 10 पर सपा के दो सूरमाओं के बीच कांटे का मुकाबला हुआ था। एक ओर जिला पंचायत अध्यक्ष गणेश यादव थे तो दूसरी ओर राजपाल यादव की पत्नी कुशल। मतगणना में गणेश यादव 75 वोट से जीत रहे थे, तभी एक राउंड की री-काउंटिंग कराई गई। इसकी दरखास्त राजपाल पक्ष ने की थी। इसके बाद गणेश यादव 45 वोट से जीतने जा रहे थे, लेकिन इस बार पूरे वार्ड की री-काउंटिंग का आदेश दे दिया। इसमें गणेश दो वोट से हार गए। बाद में भारी बवाल हुआ था।
उस समय प्रशासन ने कहा था कि दूसरी बार की री-काउंटिंग के लिए चुनाव आयोग से सलाह मशविरा किया गया था। मौखिक आदेश मिलने पर ही वोटों की गिनती कराई गई थी। लेकिन अब यह झूठी साबित हो गई है। गणेश यादव तभी से कह रहे हैं कि अगर आयोग का आदेश था, तो उन्हें दिखाया क्यों नहीं गया। हालांकि, एसके अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि आरओ और डीएम को री-काउंटिंग कराने का अधिकार है।
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डीएम बोले, निष्पक्ष गिनती हुई है, कैमरे लगे थे
राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त जब वार्ड 10 की री-काउंटिंग के सवाल पर जवाब दे रहे थे, तभी डीएम पंकज कुमार बीच में बोल पड़े। उन्होंने कहा कि  पहली बार 75 वोटों का अंतर था, लेकिन एक राउंड की री-काउंटिंग में यह 45 का हो गया। अंतर ज्यादा था, इसलिए पूरे वार्ड की री-काउंटिंग करानी पड़ी। सभी टेबल पर मीडिया के कैमरे थे, एक -एक वोट पर मीडियाकर्मियों की नजर रही। यह मामला अब हाईकोर्ट में जा चुका है, इसलिए ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं होगा।
बताएं, तोताराम क्यों नहीं पकड़ा गया
राज्य के मुख्य निवार्चयन आयुक्त एसके अग्रवाल से पूछा गया कि एटा में सीओ को गाली देने वाले सपा नेता पुष्पेंद्र यादव और मैनपुरी में बूथ कैप्चरिंग करने वाले दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री तोताराम की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? इस पर उन्होंने कहा कि एटा में तो एसपी के खिलाफ आयोग ने जो लिखा, वह निलंबन से ज्यादा कार्रवाई है। उन्हें हटाया भी गया। आरोपियों की गिरफ्तारी के भी पुलिस ने प्रयास किए। इसी बीच उन्होंने एसएसपी मैनपुरी को बुलाकर पूछा कि तोताराम गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ? उन्होंने जवाब दिया कि वे हाईकोर्ट चले गए, पुलिस उनकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है। डीजीपी जगमोहन यादव ने बताया कि सीओ को धमकाने वाले सपा नेता ने पुलिस के दबाव में सरेंडर किया।
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