द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने बताया के आगरा से सऊदी अरब, यूएई, इराक, ईरान, कुवैत, बहरीन समेत कई देशों में जूतों का निर्यात होता है। खाड़ी देशों में युद्ध के चलते समुद्र में जूतों से लदे 2800 कंटेनर फंसे हुए हैं। माल से भरे 2100 कंटेनर देश के विभिन्न पोर्ट पर खड़े हैं। एक कंटेनर में 7200 जोड़ी जूते आते हैं। इस तरह से 4900 कंटनेर में 3.5 करोड़ से अधिक जोड़ी जूते हैं।
उन्होंने बताया कि जूतों को नमी और फंगस से बचाने के लिए रसायनों का उपयोग करते हैं। लंबे समय से ये पैकटों में बंद हैं, ऐसे में इनमें फंगस लगने का खतरा बढ़ गया है। फंगस लगने से जूता की गुणवत्ता प्रभावित होगी और निर्यात योग्य नहीं होगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुलने के बाद ही कंटेनर विभिन्न देशों में जा सकेंगे।
सीजफायर से नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद
जूता निर्यातक राजेश खुराना का कहना है कि युद्ध से जूता कारोबार को तगड़ा झटका लगा है, लेकिन सीजफायर से स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। रास्ता पूरी तरह खुलने के बाद निर्यात शुरू हो जाएगा। नए आर्डर मिलेंगे और भुगतान भी हो सकेगा।