आगरा में किसानों ने विकास भवन में भूखे, प्यासे 32 दिन खुले आसमान के नीचे सर्द रातें काटीं। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस जंग में आखिरकार किसान जीते और प्रशासन को झुकना पड़ा। आरोपियों के विरुद्ध दो केस दर्ज हुए। प्रशासन ने शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा है। इसके बाद किसानों ने बुधवार को धरना खत्म किया।
जिले की 21 सहकारी समितियों के गोदाम निर्माण में फर्जीवाड़े के विरोध में किसान नेता श्याम सिंह चाहर और चौधरी दिलीप सिंह के नेतृत्व में किसान धरना दे रहे थे। प्रशासन की बेरुखी पर दोनों किसान नेताओं ने 30 दिन पहले अन्न-जल त्याग दिया था। इससे छह बार उनकी हालत बिगड़ी और जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मंगलवार देर रात गोदाम निर्माण करने वाली फर्म और समितियों के ऑडिट में फर्जीवाड़ा करने के आरोपी सचिव पर एफआईआर दर्ज कराई गई।
बुधवार दोपहर धरना स्थल पर पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट वेद सिंह चौहान और सहकारिता विभाग के प्रभात शुक्ला ने श्याम सिंह चाहर को दूध पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। पूरे मामले में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को भी जिलाधिकारी की ओर से पत्र भेजा गया है। अंतिम दिन सपाई भी धरने को समर्थन करने पहुंचे, लेकिन तब तक धरना समापन की घोषणा हो गई थी।
वृद्ध महिलाओं के आने से उड़ी प्रशासन की नींद
मंगलवार को किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने घोषणा की थी बुधवार से उनकी वृद्ध मां मुक्ता देवी समेत अन्य 11 बुजुर्ग महिलाएं विकास भवन में अनशन करेंगी। इससे प्रशासन की नींद उड़ गई थी। अनशन के समापन के लिए अस्पताल से पहुंचे किसान नेता श्याम सिंह ने कहा कि ये उनकी अकेले की नहीं बल्कि सभी किसानों की जीत है।