कुख्यात विनोद जाट पुत्र राजवीर सिंह के खिलाफ सादाबाद के एपी इंटर कॉलेज के प्रबंधक मुनीश कुमार गौतम ने 22 अप्रैल 2019 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि विनोद जाट अपने नौ-दस साथियों के साथ उनके घर पहुंचा था। उन्हें धमकी दी और चौथ मांगी थी। प्रबंधक पर फायरिंग की थी, जिससे वह बाल-बाल बच गए थे। उस वक्त पुलिस ने घेराबंदी करके विनोद जाट को पकड़ लिया था।
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उसके साथ रिश्तेदार संतोष, नेहरू नगर निवासी विष्णु, अछनेरा के गांव कचौरा निवासी उमा, हर्ष गौतम, कागारौल निवासी राजू चाहर, अलीगढ़ निवासी महेश चौधरी भी पकड़े गए थे। इस मामले में पुलिस मुठभेड़ का मुकदमा तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने दर्ज कराया था। 23 अप्रैल 2019 को आरोपियों को जेल भेजा गया था। इस मामले में 30 अक्तूबर 2019 को उसकी जमानत हो गई थी।
विनोद जाट बर्खास्त सिपाही है। पहले वो बर्खास्त सिपाही देवेंद्र के साथ काम करता था। उसके जेल जाने के बाद खुद ही काम करने लगा। लूट, फिरौती मांगने, अपहरण की घटनाएं कर चुका है। जेल से बाहर आने के बाद हाथरस और अलीगढ़ में जमीनों का काम शुरू किया था। उस पर 26 मुकदमे दर्ज हैं। अलीगढ़ के इगलास में कारोबारी के अपहरण के मामले में उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।
झांसी के कारोबारी के अपहरण में आया नाम
28 दिसंबर 2015 को कागारौल में पशु कारोबारी से 45 लाख रुपये की लूट हुई थी। इसमें विनोद जाट का ही नाम सामने आया था। झांसी में दो साल पहले दो सराफा कारोबारियों का अपहरण हुआ था। कारोबारियों से करोड़ों की रकम मांगी गई थी। कारोबारियों को सिकंदरा क्षेत्र से मुक्त कराया गया था।