आगरा के कोर्ट में समर्पण करने वाला कुख्यात इनामी विनोद जाट पुलिस का सिपाही रहा है, इसलिए पुलिस की कार्य प्रणाली को अच्छी तरह से जानता है। कानपुर में गैंगेस्टर विकास दुबे एनकाउंटर के बाद माना जा रहा था कि कि विनोद या तो सरेंडर करेगा या फिर उसकी नाटकीय गिरफ्तारी होगी। हर बार ऐसा ही हुआ है। पुलिस ने विनोद पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया तो एनकाउंटर के डर से वो मास्क पहनकर आगरा में एक पुराने मुकदमे में कोर्ट में हाजिर हो गया। पुलिस उसे पहचान तक नहीं पाई।
संबंधित खबर: 50 हजार के इनामी बदमाश विनोद जाट ने किया कोर्ट में समर्पण, यूपी पुलिस में रहा चुका है सिपाही
विनोद जाट 2011 में पुलिस में भर्ती हुआ था। उसके बाद आगरा की एक लूट में उसका नाम आ गया। इससे पहले वो बर्खास्त सिपाही देवेंद्र जाट निवासी गांव ऊधर तहसील मांट जिला मथुरा के संपर्क में आ गया। इन दोनों के साथ-साथ एक और सिपाही संतोष, जोकि देवेंद्र के गांव महामौनी का ही है, इस गैंग में शामिल हो गया।
आगरा में लूटे थे 45 लाख
28 दिसंबर 2015 को आगरा के कारगौल में एक पशु व्यापारी से 45 लाख की लूट में यह तीनों बदमाश शामिल थे। झांसी के दो सर्राफा व्यापारियों का अपहरण भी विनोद जाट गैंग ने किया और 30 करोड़ की फिरौती मांगी। बाद में आगरा से यह दोनों व्यापारी बरामद हुए थे।