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विनोद जाट: पुलिस से बर्खास्त होने के बाद बना कुख्यात बदमाश, हर बार नाटकीय गिरफ्तारी या सरेंडर

Sat, 18 Jul 2020 11:54 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • पुलिस के सिपाही से कुख्यात बदमाश बना विनोद जाट, आगरा में लूटे थे 45 लाख, दर्ज हैं 26 मुकदमे  
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कुख्यात विनोद जाट का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के कोर्ट में समर्पण करने वाला कुख्यात इनामी विनोद जाट पुलिस का सिपाही रहा है, इसलिए पुलिस की कार्य प्रणाली को अच्छी तरह से जानता है। कानपुर में गैंगेस्टर विकास दुबे एनकाउंटर के बाद माना जा रहा था कि कि विनोद या तो सरेंडर करेगा या फिर उसकी नाटकीय गिरफ्तारी होगी। हर बार ऐसा ही हुआ है। पुलिस ने विनोद पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया तो एनकाउंटर के डर से वो मास्क पहनकर आगरा में एक पुराने मुकदमे में कोर्ट में हाजिर हो गया। पुलिस उसे पहचान तक नहीं पाई। 

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संबंधित खबर: 50 हजार के इनामी बदमाश विनोद जाट ने किया कोर्ट में समर्पण, यूपी पुलिस में रहा चुका है सिपाही


विनोद जाट 2011 में पुलिस में भर्ती हुआ था। उसके बाद आगरा की एक लूट में उसका नाम आ गया। इससे पहले वो बर्खास्त सिपाही देवेंद्र जाट निवासी गांव ऊधर तहसील मांट जिला मथुरा के संपर्क में आ गया। इन दोनों के साथ-साथ एक और सिपाही संतोष, जोकि देवेंद्र के गांव महामौनी का ही है, इस गैंग में शामिल हो गया।
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आगरा में लूटे थे 45 लाख  

28 दिसंबर 2015 को आगरा के कारगौल में एक पशु व्यापारी से 45 लाख की लूट में यह तीनों बदमाश शामिल थे। झांसी के दो सर्राफा व्यापारियों का अपहरण भी विनोद जाट गैंग ने किया और 30 करोड़ की फिरौती मांगी। बाद में आगरा से यह दोनों व्यापारी बरामद हुए थे। 

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26 नवंबर 2017 को विनोद जाट हाथरस शहर में रूई की मंडी से बड़े की नाटकीय ढंग से पकड़ा गया था। हर बार वारदात के बाद वो जमानत पर बाहर आ जाता है। पिछले वर्ष उसने अपने साथियों के साथ आगरा के दयालबाग में उमा विहार निवासी मुनीश गौतम के घर पर हमला बोला था। मुनीश सादाबाद क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में प्रबंधक हैं।

एक सप्ताह पहले ही खुली है हिस्ट्रीशीट

विनोद जाट के मामले में सबसे अचरज की बात तो यह है कि विनोद मुरसान के गांव महामौनी का रहने वाला है और वो 50 हजार रुपये का इनामी भी है, लेकिन कोतवाली मुरसान में उसकी हिस्ट्रीशीट सप्ताह भर पहले ही खुली है। 

इस हिस्ट्रीशीट में उस पर दर्जन भर मुकदमे दिखाए गए हैं। इसमें आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और हाथरस के मुकदमे शामिल हैं। कोतवाली निरीक्षक संजीव कुमार शर्मा का कहना है कि विनोद की हिस्ट्रीशीट एक सप्ताह पहले ही खोली गई है। वो उनके यहां से धारा 307 के एक मामले में वांछित है।
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