आगरा के हरीपर्वत के घटिया आजम खां स्थित सत्संग वाली गली में सोमवार शाम को बंदरों के कूदने से दो मंजिला मकान की दीवार भरभराकर गिर गई, जिसमें दबकर मकान मालिक लक्ष्मण तुलसियानी और मजदूर वीरा की मौत हो गई। घटना से परिवार में चीखपुकार मच गई। सूचना पर पुलिस पहुंच गई।
सत्संग वाली गली निवासी 55 वर्षीय लक्ष्मण तुलसियानी एक बैंक में सोने के जेवरात परखने का काम करते थे। परिजनों ने पुलिस को बताया कि मकान में तीन भाइयों का परिवार रहता है। मकान दो मंजिला है। इसकी छत पत्थर के पटाव की थी।
मकान काफी पुराना हो गया था। इस कारण छत को तुड़वाकर लेंटर डलवा रहे थे। इसके लिए मकान के तीन तरफ की दीवार तोड़ दी गई थीं। एक दीवार बची थी।
सोमवार शाम को 4:30 बजे लक्ष्मण तीन मजदूरों से मलबा हटवा रहे थे। लक्ष्मण और मजदूर वीरा पहली मंजिल की छत पर थे। दो मजदूर दूसरी तरफ काम कर रहे थे। तभी 30-40 बंदरों का झुंड आ गया। उन्होंने दीवार पर चढ़कर कूदना शुरू कर दिया। दीवार नौ इंच की थी।
बंदर एक दूसरे पर कूदने लगे। इससे दीवार हिल गई और भरभराकर गिर पड़ी। दीवार सीधे लक्ष्मण और वीरा पर गिरी। वह दोनों दब गए। भूतल पर दोनों के दबने पर परिजन आ गए। इससे चीखपुकार मच गई। दोनों को मलबा हटाकर बाहर निकालने के बाद अस्पताल ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिजन दोनों के शव घर ले आए। सूचना पर पुलिस पहुंच गई।
थाना हरीपर्वत के प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने बताया कि परिजनों ने लक्ष्मण के शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। हादसा बंदरों के दीवार पर कूदने की वजह से हुआ।
पहले भी जान ले चुके हैं बंदर
शहर में बंदरों से कई बार घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों की जान तक जा चुकी है। मार्च 2020 में शाहगंज के आजमपाड़ा में बेटी को बचाने छत पर गए उस्मान पर बंदरों ने हमला कर दिया था। इस दौरान उस्मान छत से गिर गए थे। उनकी मौत हो गई थी।
जुलाई 2019 में माईथान में हरिशंकर गोयल पर बंदरों ने हमला कर दिया। बंदरों के हमले में उनकी मौत हो गई। नवंबर 2018 में रुनकता में बालक को मां की गोद से एक बंदर उठाकर ले गया था। इसके बाद उसे मार डाला था।
इससे पहले एमजी रोड पर एक अधिवक्ता की बाइक के आगे बंदर आ गए थे। उनकी मौत हो गई थी। रावली में भी एक व्यक्ति की बंदरों के हमले में मौत हो गई थी। इससे पहले भी मौत हो चुकी हैं।
मोहल्ले के लोगों में आक्रोश
लोगों का कहना था कि बंदरों से हमला करने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। बंदरों को पकड़ने के लिए कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। मगर, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बंदर सामान लेने के लिए झपट्टा मारते हैं। इस दौरान बचने के चक्कर में लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं।