ताजमहल और आगरा किला के बीच प्रो-पूअर टूरिज्म डेवलपमेंट की योजना में वॉकवे बनाया जा रहा है। किले के पास शाहजहां पार्क से ताजमहल के बीच में यह तैयार हो रहा है।
18.05 करोड़ रुपये विश्व बैंक से कर्ज लेकर पार्क में वॉकवे के नाम पर फिर से पत्थर लगाए जा रहे हैं। पार्क का प्रमुख आकर्षण पुरानी झील है, जिसके पुनरूद्धार को पहले इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया।
लेकिन बाद में झील और म्यूजिकल फाउंटेन को हटा दिया गया। नौ करोड़ रुपये से शाहजहां पार्क में जो काम कराए गए, विश्व बैंक से कर्ज लेकर फिर वही काम दोहराए जा रहे हैं।
पहले पत्थरों के फुटपाथ को पाथवे का नाम दिया गया, अब वॉकवे पर कर्ज की रकम खर्च की जा रही है, जिसे आम आदमी से लिए गए टैक्स से चुकाया जाएगा।
शाहजहां पार्क में पत्थरों का वाकवे बनाने के अलावा इसका आकर्षण बढ़ाने की कोई योजना नहीं है, यहां की झील फिर भी सूखी रहेगी।
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक अमित श्रीवास्तव का कहना है कि झील वॉकवे में शामिल नहीं है। कई कार्य इस योजना में हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
नौ करोड़ लगाए जा चुके हैं ठिकाने
पर्यटन मंत्रालय ने सात साल पहले शाहजहां पार्क के विकास के लिए नौ करोड़ रुपये यूपी टूरिज्म को दिए थे। यूपी राजकीय निर्माण निगम ने यहां लाल पत्थर का पाथवे, सजावटी लाइटिंग, छह रेन वाटर हार्वेस्टिंग के टैंक, पौधरोपण, 100 बेंच, तीन सुलभ शौचालय का निर्माण, फुव्वारे की स्टोन रेलिंग का निर्माण, झील के लिए पैडल वोट की व्यवस्था की।
निर्माण निगम ने यहां बेहद घटिया काम किया, जिसमें काम पूरा होने से पहले ही पाथवे और लाइटों के पत्थर टूटने शुरू हो गए। एक साल के अंदर तो रेलिंग टूट गईं और बेंच का पता नहीं। पर्यटन विभाग ने पार्क के काम में घटिया सामग्री की शिकायतें की थी, लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी।
निर्माण निगम के काम केबाद उद्यान विभाग ने झील के संचालन का ठेका भी उठाया। झील में पैडल वोट डालने के साथ ही यहां बतखें और अन्य जलीय जीव भी नजर आने लगे। हर दिन 20-25 विदेशी और 100 से ज्यादा भारतीय झील में वोटिंग के लिए पहुंच रहे थे, लेकिन पुरानी मंडी पर गेट के विवाद के बाद ही यहां वोटिंग बंद कर दी गई। तभी से झील सूखी है।