मैनपुरी। जिले में वायरल फीवर के साथ ही सर्दी-जुकाम दस्तक दे चुका है। बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए हर रोज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर के चैंबर के बाहर खड़े होकर मरीज को अपनी बारी का घंटे भर इंतजार करना पड़ रहा है। डॉक्टर बिना नब्ज टटोले ही मरीज को 25 से 30 सेकंड में दवा लिखकर टरका रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में 1052 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें फिजीशियन और बाल रोग विशेषज्ञ के पास मरीजों की अधिक भीड़ रही। फिजीशियन कक्ष में करीब दो सौ मरीज उपचार के लिए पहुंचे। यहां इतनी अधिक भीड़ थी कि डॉक्टर के पास मरीज की नब्ज टटोलने का समय तक नहीं था।
डॉ. धर्मेंद्र कुमार के पास पहुंचे मरीजों को खड़े-खड़े बिना नब्ज आदि के देखे ही उपचार लेते हुए देखा गया। यही हाल वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जेजे राम के कक्षा का भी था। उनके पास भी करीब दो सौ मरीज पहुंचे, उन्हें भी मरीजों की नब्ज टटोलने का समय नहीं था। मरीज से उसकी बीमारी पूछी और दवा लिख दी।
एक तरफ जहां जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है, वहीं दूसरी तरफ कुछ डॉक्टर उपचार में लापरवाही भी कर रहे हैं। मंगलवार को सर्जन कक्ष के बाहर मरीज खड़े थे और वे बीच में ही उठकर चले गए। करीब एक घंटे तक यहां मरीज परेशान रहे। इसके बाद जब वे लौटे तो उन्होंने भी मरीजों को बिना किसी जांच के ही उपचार दिया।
जिला अस्पताल में पर्ची काउंटर और दवा काउंटर पर प्रत्येक दिन लंबी लाइनें लगती हैं। यहां आधे से एक घंटे तक मरीजों या उनके साथ आने वाले तीमारदारों को लाइन में लगना पड़ता है। कई लोग तो यह देखकर बाहर से दवा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं कि एक घंटे तक लाइन में कौन लगेगा। वहीं गर्मी के मौसम में जहां लाइन लगती है वहां पंखा आदि की भी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे लोग गर्मी से भी व्याकुल रहते हैं।
जिला अस्पताल में 27 पदों के सापेक्ष मात्र नौ डॉक्टरों की तैनाती है। ऐसे में जो भी मरीज आता है उसे हर संभव उपचार दिलाया जा रहा है। एक-एक डॉक्टर के पास 100 से लेकर 150 तक मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे में जितना समय मिलता है उतना दिया जा रहा है। गंभीर मरीजों को भर्ती कर संतोषजनक उपचार दिया जा रहा है। - डॉ. मदनलाल, सीएमएस