कोसीकलां (मथुरा)। गुरुग्राम में दिहाड़ी मजदूरी करके पेट पाल रहे थे मगर अब न पैसा धेला बचा और ना ही कुछ खाने को मिल रहा है। हालत खराब होने लगी तो बच्चों को लेकर झांसी गांव जाने के लिए निकल पड़े। साहब तीन दिन से मंडी समिति परिसर में कैद पड़े हैं। अगर कोई खाने को दे देता है तो खा लेते नहीं तो पानी पीकर ही काम चला रहे हैं। राजमार्ग पर पुलिसकर्मियों द्वारा रोके जाने पर मजदूरों ने बताई अपनी व्यथा।
मूल रूप से झांसी के गांव जारबो के रहने वाले सुक्खन और रोहताश ने बताया कि वह पिछले पांच साल से गुरुग्राम में रह रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण सब कुछ बंद हो गया तो काम धंधा छूट गया। थोड़ी बहुत जमा पूंजी थी, जिससे रोटी का जुगाड़ चल रहा था। अब पैसे भी खत्म हो गए और कहीं से मदद भी नहीं मिल रही थी। बच्चों को कब तक भूखा रखते, ऐसे में गांव जाना ही सही लगा। कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए।
तीन दिन से मंडी समिति परिसर में कैद हैं। प्रशासन ने न तो कोई भोजन का इंतजाम किया और ना ही भेजने के लिए कोई बसों की व्यवस्था की है। ऐसे में वह मंडी समिति परिसर में कैद होकर रह गए, उन्हें इस जेल से निकलकर घर जाने की जल्दी है। जबकि मंडी में आने वाले किसान और आढ़तियां भी उन्हें हीन दृष्टि से देख रहे हैं कि वह कोरोना संक्रमण के मरीज तो नहीं हैं।