वृंदावन कुंभ मेला में कभी हाथियों की मौजूदगी आकर्षण का केंद्र बनती थी। साधु-संत हाथियों पर सवारी करते थे। यहां हाथियों की संख्या एक-दो नहीं 30 से 40 तक हो जाती थी। दो कुंभ मेला पहले वृंदावन में हाथी विचर (चिढ़) गया था। तब लोग घरों में कैद हो गए। यह वाक्या वृंदावन के लोगों के जहन में आज भी है।
हरिद्वार से पहले वृंदावन में आयोजित होने वाले कुंभ मेला बैठक के रोचक किस्से यहां के लोगों के बीच एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। वैष्णवों के इस कुंभ में कभी हाथियों की मौजूदगी हुआ करती थी। वृंदावन के लिए यह हाथी साधु-संतों के बीच कौतूहल का विषय बनते थे।
1998 से पहले के कुंभ तक बड़ी संख्या में यहां हाथी सहित अन्य जानवर लाए जाते थे। सांप, अजगर भी होते थे। लेकिन पिछले तीन कुंभों के दौरान हाथी पूरी तरह से गायब हैं। अब इन्हें सरकार की सख्ती के चलते यहां नहीं लाया जाता है। साधु-संतों की सवारी भी बगैर हाथी के निकलती है। वृंदावन कुंभ में हाथी से जुड़ी घटना यहां के लोगों को आज भी याद है।