मथुरा के वृंदावन में मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल के दौरान ध्वस्त हुए मंदिरों में शामिल गोविंद देव मंदिर इस्लामिक कट्टरपंथ की कहानी बयां करता है। उत्तर भारत का सुंदर और विशाल गोविंद देव मंदिर में आज भी कट्टरपंथी विचारधारा के निशान मौजूद हैं। मंदिर की सातवीं मंजिल पर जलता हुआ विशालकाय घी का दीपक औरंगजेब को इतना खटका कि उसने चार मंजिल ही तुड़वा दी थीं। हालांकि अंग्रेज कलक्टर ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर मस्जिद को हटवाया था।
मूर्ति जाने के बाद गोविंद देव मंदिर के शिखर भाग को औरंगजेब द्वारा तोड़ दिया गया और वहां एक छोटी मस्जिद बना दी गई जिसे वृंदावन के तत्कालीन स्थानीय लोग कलंदरी मस्जिद कहते थे। मथुरा के तत्कालीन जिलाधिकारी एफएस ग्राउस ने गोविंद देव मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य कराया और मस्जिद को हटा दिया। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान में संग्रहीत अभिलेखों से कलंदरी मस्जिद के विषय में जानकारी प्राप्त होती है। उस समय तक गोविंद देव मंदिर का अधिकांश भाग एवं गर्भगृह आदि नष्ट हो चुके थे और मंदिर एक कूड़े के ढेर में बदल चुका था।
गोपाल शरण शर्मा, प्रकाशन अधिकारी, ब्रज संस्कृति शोध संस्थान
विक्रम संवत 1900 में लिखे गए इतिहास ग्रंथ वृंदावन धामानुरागावली नामक ग्रंथ में भी कलंदरी मस्जिद का जिक्र मिलता है। यह ग्रंथ वृंदावन के तत्कालीन कवि गोपालराय ने लिखा था।