वृंदावन (मथुरा)। वृंदावन कुंभ का श्रीगणेश करने की परंपरा सदियों से काठिया बाबा आश्रम निभाता आ रहा है। इस बार भी कुंभ मेला की ध्वजा भव्य शोभायात्रा के साथ यहीं से निकलेगी। इसमें हाथी, घोड़ा और ऊंटों की सवारी के साथ ठाकुर जी का डोला, संत, महंत, महामंडलेश्वर और भक्तों की टोलियां शामिल होंगी।
ब्रजविदेही चतु:संप्रदायी श्रीमहंत स्वामी रासविहारी दास काठिया बाबा महाराज बताते हैं कि ये उनके लिए चौथा वृंदावन कुंभ मेला बैठक है, जिसकी ध्वजा लेकर वे आश्रम से जाएंगे। इससे पहले इस आश्रम की गुरु परंपरा इसे निभाती आ रही है। श्रीमहंत बाबा महाराज बताते हैं कि बसंत पंचमी के दिन कुंभ मेला बैठक की ध्वजा भव्य शोभायात्रा के साथ नगर भ्रमण करते हुए मेला स्थल पहुंचेगी। इसमें दो हाथी, 11 घोड़े और चार ऊंटों की भी सवारी होंगी। घोड़ा गाड़ी पर ठाकुर जी की सवारी होगी। नफीरी और दो बैंड भी इस शोभायात्रा में शामिल होंगे। सैकड़ों साधु-संत और भक्तजन भी कुंभ मेला बैठक की शोभायात्रा का हिस्सा बनेंगे। राजशाही परंपरा के तहत यह शोभायात्रा निकलेगी। मेला स्थल पर भूमि पूजन, ध्वजा पूजन के साथ वृंदावन कुंभ मेला बैठक की शुरुआत हो जाएगी। यही परंपरा सदियों से चली आ रही है। श्रीबाबा महाराज ने बताया कि हाथी के लिए अनुमति की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
कुंभ में बंदरों से बचाव के लिए लंगूर की हो व्यवस्था
अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा ने वृंदावन कुंभ मेला बैठक में बंदरों से बचाव करने के लिए लंगूरों की व्यवस्था करने की मांग की है। महासभा के नगर अध्यक्ष आचार्य रामविलास चतुर्वेदी ने कहा है कि कुंभ मेला में बड़ी संख्या में साधु, संत, महंत आएंगे। भक्तों की भी मौजूदगी रहेगी। विभिन्न आयोजन कि जाएंगे। इसमें बंदरों का आतंक व्यवधान पैदा करेगा। इससे बचने के लिए लंगूरों की व्यवस्था होनी चाहिए।