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SIR in UP: वक्त कम, काम पहाड़ जैसा...ऐसे तो वंचित हो जाएंगे 6.40 लाख मतदाता

Mon, 09 Feb 2026 12:01 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले चरण में 8.36 लाख मतदाताओं के नाम सूचियों से कट गए। अब 6.40 लाख मतदाताओं के वोट पर नोटिस से संकट खड़ा हो गया है। वक्त कम है और काम पहाड़ जैसा है। फिर भी एसआईआर के दूसरे चरण में नोटिस छपने, वितरित होने से लेकर सुनवाई तक में प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है।
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मतदाता।
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विस्तार
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विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में नोटिस की सुनवाई के लिए 27 मार्च तक मियाद है। लेकिन, अपर सहायक एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के कार्यशैली कछुआ चाल जैसी है। 7 जनवरी से नोटिस प्रक्रिया शुरू हुई थी। पिछले 38 दिन में 96 हजार मतदाताओं की सुनवाई हो सकी है। जबकि 7.64 लाख मतदाताओं को नोटिस मिलेंगे। इनमें 3.25 लाख मतदाता वह हैं जिनका 2003 की सूची में रिश्तेदारों से विवरण मेल नहीं खा रहा और 4.38 लाख ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने गणना फाॅर्म ही गलत भरे।
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इस तरह 7.64 लाख मतदाताओं का वोट नोटिस और कागजी साक्ष्यों पर निर्भर हो गया है। पिछले 38 दिन में 7.64 लाख में 96 हजार मतदाताओं की सुनवाई शनिवार तक हो सकी है। यानी रोज औसतन 2526 लोगों की सुनवाई हो रही है। इसी रफ्तार से चले तो अगले 48 दिन में महज 1.18 लाख की सुनवाई हो सकेगी। इस तरह 6.40 लाख मतदाताओं का वोट संकट में आ सकता है।

 

फाइलों में दबे नोटिस, अनजान है मतदाता
हैरानी की बात यह है कि जिन 7.64 लाख मतदाताओं के नए नाम कट सकते हैं, उन्हें खबर हीं नहीं। वह अनजान हैं। 7.64 लाख में 1.14 लाख ऐसे हैं, जिनके नोटिस ही नहीं बने। 4.89 लाख ऐसे मतदाता हैं जिनके पास 38 दिन बाद भी नोटिस नहीं पहुंचे। जबकि सुनवाई से वंचितों की संख्या 6.68 लाख है। नोटिस का जवाब नहीं देने पर मतदाताओं के नाम 10 अप्रैल को प्रकाशित होने वाली सूचियों से कट जाएंगे।

 

रोज 14 हजार की जगह सिर्फ 2526 की सुनवाई
 6.68 लाख मतदाताओं की सुनवाई के लिए 47 दिन शेष है। ऐसे में प्रतिदिन करीब 14 हजार लोगों की सुनवाई की जरूरत है। पिछले 38 दिन में औसतन रोज 2526 मतदाताओं की सुनवाई हो सकी है। नौ विधान सभा क्षेत्र हैं। प्रत्येक क्षेत्र में चार सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हैं। इनके साथ सुनवाई के लिए 209 अपर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। लेकिन, मतदाताओं की शिकायत है कि सुनवाई के लिए अधिकारी बूथों पर नहीं बैठ रहे।

 

बढ़ाए जा रहे 40 अतिरिक्त एईआरओ
 गणना प्रपत्र में विसंगति वाले 4.39 लाख मतदाताओं के नोटिसों का सत्यापन बीएलओ से भी कराया जा रहा है। सुनवाई के लिए 40 अतिरिक्त अपर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तैनात किए जा रहे हैं। 27 मार्च तक सुनवाई होगी। समय बढ़ने से काम पूरा हो जाएगा। - यमुनाधर चौहान, उप जिला निर्वाचन अधिकारी



 
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उठ रहे ये सवाल
- जब 6.50 लाख नोटिस छप चुके हैं, तो उन्हें घर तक पहुंचाने में देरी क्यों हो रही है।
- 2.75 लाख मतदाताओं को नोटिस पहुंच चुके तो सुनवाई में देरी क्यों हो रही।
- क्या आगामी 47 दिनों में वंचित लोगों को लोगों मताधिकार सिद्ध करने का मौका मिल पाएगा।
- क्या अपर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी जानबूझकर लापरवाही बरत रहे हैं।
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