पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा
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दो हजार विसरा का परीक्षण न कराए जाने के मामले में समाजसेवियों में गुस्सा है। उनका कहना है कि यह मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है। महफूज संस्था के नरेश पारस ने मानवाधिकार आयोग में इसकी शिकायत की है। उनका कहना है कि पुलिस इन विसरा का जल्द से जल्द परीक्षण कराएं।
उन्होंने बताया कि ये विसरा किन लोगों के हैं? क्या उनके शव की अब तक पहचान नहीं हुई? अगर हो गई तो विसरा को इस तरह लावारिस रखने का क्या मतलब है? इसी से तो पता चलेगा कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का। दोनों सूरत में रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जानी चाहिए।
एसएन मेडिकल कॉजेल के पुराने पोस्टमार्टम हाउस में वर्ष 1990 से 2004 तक के 2000 विसरा रखे हैं। क्षेत्र बजाजा कमेटी के अध्यक्ष सुनील विकल का कहना है कि यह प्रशासन की लापरवाही का मामला है। उनकी कमेटी लावारिस शवों का दाह संस्कार कराती है। अस्थि विसर्जन करती है। एक करोड़ रुपये में पोस्टमार्टम हाउस की बिल्डिंग तैयार कराकर स्वास्थ्य विभाग को दे दी है।