आगरा में तेज गर्मी, फिर बरसात। इससे वायरल बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लगभग हर घर में मरीज हैं। सोमवार को एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। मेडिसिन विभाग और त्वचा रोग विभाग में सबसे ज्यादा मरीज आए। एक घंटा अतिरिक्त मरीजों को देखा गया।
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एसएन की ओपीडी में 3,155 मरीज आए। सुबह से काउंटर पर भीड़ जमा हो गई। पर्चे के लिए धक्कामुक्की हुई। घंटे भर में पर्च बन पाए। सबसे ज्यादा मेडिसिन विभाग में 656 मरीज आए। इनमें सबसे ज्यादा वायरल बुखार, डायरिया के मरीज रहे। मेडिसिन विभाग के डॉ. अजित चाहर ने बताया कि बदले मौसम के चलते वायरल बुखार हो रहा है। इसमें तेज बुखार, सिर-पेट में दर्द और घबराहट भी हो रही है। शुरुआत में मांसपेशियों में दर्द, थकान महसूस होती है। 5-8 घंटे बाद बुखार आ रहा है। मरीज के आसपास के लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। उल्टी-दस्त होने से मरीज की हालत और बिगड़ रही है। इनमें से 5-8 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज यादव ने बताया कि मलेरिया, वायरल फीवर, डायरिया और पीलिया के सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं। सोमवार को 216 मरीज आए। इसमें दूषित पानी और स्टॉलों पर बिकने वाली खुली खाद्य सामग्री से पीलिया अधिक हो रहा है। बदले मौसम से बच्चों को तेज बुखार, गले में दर्द-खराश और खांसी हो रही है। उल्टी-दस्त के भी मरीज आ रहे हैं।
खुजली, लाल दाने और फंगल इन्फेक्शन के बढ़े मरीज
त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि 384 मरीज ओपीडी में आए। इसमें 80 फीसदी को लाल दाने, चकत्ते, खुजली और फंगल इन्फेक्शन के मरीज रहे। इनमें धूप और गर्मी में काम करने वाले लोगों की संख्या अधिक है। बाल टूटने की समस्या भी बढ़ गई। इनको दवा देने के साथ शरीर को सफाई रखने के लिए भी बताया गया।
ये करें:
- वायरल फीवर के मरीज खुद को क्वारंटीन करें। डॉक्टर के परामर्श से दवा लें।
- खांसी-जुकाम होने पर बच्चों को स्कूल भेजने से बचें। मास्क लगाकर भेजें।
- खुले में बिकने वाली सामग्री, बच्चाें को बर्फ के गोले वाली आइसक्रीम न खिलाएं।
- पानी को उबालकर ठंडा होने पीएं। रेफ्रिजरेटर में रखा बासी भोजन न करें।
- पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें, आसपास जलभराव न होने दें।
- कूलर की टंकी के पानी को सात दिन में खाली कर साफ कर दें।