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UP: एक गांव ऐसा...जहां प्रधान आगरा का, सांसद और विधायक इटावा के; 2026 में मिलेगी नई पहचान

Fri, 04 Jul 2025 09:08 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा और इटावा जिले की सीमा पर बसे इस गांव के बारे में जो भी सुनता है हैरान रह जाता है। यहां पर दोहरी व्यवस्था से गांव के करीब 900 मतदाता प्रभावित हैं।
 
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फोटो 15- सोनीपत के खस्ताहाल गन्नौर शाहपुर से खानपुर कलां रोड पर गांव मोई के पास सड़क से उड़ती ध
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विस्तार
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आगरा और इटावा जिले की सीमा पर बसा फकीरे की मड़ैया गांव प्रशासनिक व्यवस्था के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। यह एक ऐसा गांव है जहां के निवासी अपना ग्राम प्रधान तो आगरा जिले में चुनते हैं, लेकिन जब सांसद और विधायक चुनने की बारी आती है तो वे इटावा जिले के मतदाता बन जाते हैं। इस दोहरी व्यवस्था से गांव के करीब 900 मतदाता प्रभावित हैं।
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आजादी के बाद यमुना नदी के किनारे फकीरे की मड़ैया गांव बसाया गया। शुरुआत में यह गांव प्रशासनिक रूप से आगरा जिले की बाह तहसील की ग्राम पंचायत पारना का एक मजरा था। सभी प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया आगरा जिले के तहत ही होती थीं।

राजनीतिक समीकरणों ने बदली पहचान
वर्ष 1996 में राजनीतिक लाभ के चलते इस गांव की चुनावी रूपरेखा बदल दी गई। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए इसे इटावा जनपद के जसवंतनगर विकास खंड का हिस्सा बना दिया गया। हालांकि, पंचायतीराज व्यवस्था के तहत यह गांव जिला पंचायत और प्रधानी के चुनावों के लिए आगरा की बाह तहसील से ही जुड़ा रहा। इस बदलाव से गांव को दो जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था में उलझा हुआ है। इस दोहरी व्यवस्था से ग्रामीणों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए इटावा जिले का चक्कर लगाना पड़ता था। जबकि पंचायत से जुड़े विकास कार्यों और चुनावों के लिए वे आगरा की बाह तहसील पर निर्भर थे।
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ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद शासन ने 6 नवंबर 2015 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत, राजस्व ग्राम फकीरे की मड़ैया को आधिकारिक रूप से आगरा से हटाकर इटावा जिले के जसवंतनगर विकास खंड की ग्राम पंचायत बाऊथ में शामिल कर दिया गया।

पूर्ण विलय की ओर अग्रसर
राजस्व रिकॉर्ड में यह परिवर्तन होने के बावजूद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पुरानी व्यवस्था के तहत ही चल रही थी। अब इस विसंगति को पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार, आगामी 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों में फकीरे की मड़ैया को पूर्ण रूप से इटावा जनपद में कर दिया जाएगा। इस कदम के बाद गांव की दशकों पुरानी दोहरी पहचान समाप्त हो जाएगी और इसे एक स्थायी प्रशासनिक पहचान मिल सकेगी। 
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