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बबलू यादव हत्याकांड: अब तक नहीं हुई हत्यारोपियों की गिरफ्तारी, पुलिस के खिलाफ आक्रोश

Fri, 04 Jan 2019 11:59 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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विरोध प्रदर्शन करते बबलू यादव के परिजन - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के प्रॉपर्टी डीलर बबलू यादव के हत्यारोपी 18 दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं किए जा सके हैं। परिजन दहशत में हैं। पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई से आक्रोशित परिजन और ग्रामीण गुरुवार को एसएसपी ऑफिस पहुंचे। वो हाथों में नारे लिखे पोस्टर और बैनर लिए थे। 
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एसपी सिटी प्रशांत वर्मा के आश्वासन पर संतुष्ट नहीं हुए। सात घंटे बाद एडीएम सिटी ने परिजनों से वार्ता की। पांच दिन का समय मांगा। इस पर परिजन राजी हो गए। शाम छह बजे धरना समाप्त कर दिया गया।

थाना सिकंदरा के ककरैठा निवासी बबलू यादव पुत्र राजेंद्र यादव की हत्या 15 दिसंबर 2018 को होली पब्लिक स्कूल के सामने की गई थी। परिजनों ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। 
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पुलिस के खिलाफ नारेबाजी

परिजनों का कहना है कि पुलिस कई बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। इसके बावजूद एक भी आरोपी नहीं पकड़ा जा सका है। पुलिस हर बार खुलासे के लिए समय मांगती है। इसके बाद समय निकल जाता है। थाने जाने पर पुलिस कुछ नहीं बताती है।

पीड़ित परिजन गुरुवार सुबह 10 बजे एसएसपी ऑफिस पहुंचे। मृतक बबलू यादव के पिता, भाई, ताऊ के साथ ही परिवार की महिलाएं और गांव के लोग शामिल थे। सभी हाथों में पोस्टर और बैनर लिए थे। उनमें लिखा था कि बबलू की गुहार, सुनो सरकार, मुझे क्यों मार दिया। 

पुलिस प्रशासन हाय-हाय, कानून व्यवस्था हुई फेल के नारे लिखे हुए थे। बबलू के भाई विनीत ने बताया कि एसएसपी अमित पाठक ने उनसे मुलाकात नहीं की। बाद में एसपी सिटी प्रशांत वर्मा और एएसपी अभिषेक को बुलाया गया। उन्होंने बात की।
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एडीएम सिटी ने पांच दिन का समय मांगा

विनीत का कहना था कि अगर, उन्हें किसी पर शक होता तो पहले दिन से ही नाम लिखा देते हैं। मगर, वह किसी निर्दोष को नहीं फंसाना चाहते थे। पुलिस अधिकारियों से असंतुष्ट परिजनों ने धरना समाप्त करने से इंकार कर दिया।

शाम तकरीबन साढ़े पांच बजे एडीएम सिटी आए। उन्होंने परिजनों से बात की। विनीत के मुताबिक, पांच दिन का समय मांगा। इस पर धरना समाप्त कर दिया गया। अगर, फिर भी खुलासा नहीं होता है तो नौ जनवरी से धरना शुरू कर दिया जाएगा। 

घर निकलने में लगता है डर

परिजनों का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। वह कौन हैं, किसी को नहीं मालूम। बबलू की हत्या की है। दूसरी वारदात को भी अंजाम दे सकते हैं। इस कारण घर से निकलने में डर लगता है। व्यापार नहीं कर पा रहे हैं। बच्चे पढ़ाई करने भी नहीं जा रहे हैं।  

भोजन का भी किया इंतजाम

परिजन धरना समाप्त करने के मूड में नहीं थे। वह भोजन की व्यवस्था भी करके आए थे। रात में कलक्ट्रेट पर ही सोने का प्लान बनाया था। मगर, वह आश्वासन पर मान गए। 
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