मैनपुरी जिले में रहने वाले सिपाही संदीप यादव के आत्महत्या मामले में परिजनों ने एसओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एसओ द्वारा अपमानित किए जाने के बाद डिप्रेशन में आकर सिपाही ने आत्मघाती कदम उठाया है।
मृतक के भाई ने आरोप लगाया कि पहले सिपाही को एसओजी से निकलवाया। इसके बाद जब दोबारा वापसी करनी चाही तो इंचार्ज के सामने बेइज्जत किया गया। परिजनों का कहना है कि अगर न्याय नहीं मिला तो वो मुख्यमंत्री के पास भी जाएंगे।
भोगांव क्षेत्र के गांव छिवकरिया निवासी 30 वर्षीय संदीप यादव उर्फ सोनू की पिता की मौत के बाद आश्रित के तौर पर पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर भर्ती हुई थी। वो इस समय हरदोई में तैनात था, शनिवार की सुबह बैरक में उसका शव फंदे पर लटकता मिला था।
परिजनों ने लगाए ये आरोप
शनिवार की देर शाम शव पैतृक गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। मां, भाई, पत्नी व मासूम का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रविवार सुबह अंतिम संस्कार किया गया। सिपाही की मौत को लेकर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए।
परिजनों ने आरोप लगाया कि एसओ अरुणेश कुमार गुप्ता ने करीब पांच माह पूर्व एक विवाद के बाद संदीप को एसओजी से निकलवा दिया था। इसके बाद से वो लाइन हाजिर चल रहा था, वहीं वापसी की कोशिश कर रहा था।
तेजतर्रार होने की वजह से कुछ दिन पूर्व वर्तमान एसओजी इंचार्ज हरदोई आलोक सिंह ने जब एसओ सांड़ी से संदीप के एसओजी मे लिए जाने की बात कही तो मृतक की मौजूदगी के बीच एसओ ने भला बुरा कहते हुए अपमानित करने के साथ ही उसे एसओजी में न लिए जाने की बात कह दी।
फांसी लगाकर की खुदकुशी
इस घटना के बाद से ही संदीप डिप्रेशन में चल रहा था। शनिवार को उसने बैरक में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। परिजनों का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए अगर हरदोई पुलिस से न्याय नहीं मिला तो वो मुख्यमंत्री का दरवाजा खटखटाएं।
रविवार की सुबह सिपाही संदीप यादव का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया गया। परिजनों का कहना था कि अंतिम संस्कार में थाने का सिपाही तक नहीं आया। परिजन बोले कि जिस महकमे में नौकरी करते हुए पिता इस दुनिया से चले गए, उसी में बेटा भी चला गया, मगर विभाग ने एक बार भी सुध लेने की जरूरत महसूस नहीं की।