एटीएम केबिन में मदद का झांसा देकर डेबिट कार्ड बदल लेने और खाते से रकम निकाल लेने वाले गिरोह के एक और सदस्य सतीश कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया शख्स पेटीएम कंपनी में कर्मचारी था। बिना सत्यापन के इसने गिरोह को कंपनी की मशीनें बेची थीं। कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया है। उसने दो और साथियों के नाम बताए हैं। पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी है।
थाना शाहगंज के प्रभारी निरीक्षक समरेश सिंह ने बताया कि शुक्रवार को 3 आरोपियों हरियाणा के जिला मेवात निवासी आजम खां, जेवर निवासी नासिर और पीलीभीत निवासी करन को गिरफ्तार किया था। आजम और नासिर एटीएम में रुपये निकालने आने वालों को झांसे में लेकर डेबिट कार्ड बदलकर खाते से रकम निकाल लेते थे। बाकी सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों ने संगीता नामक महिला के खाते से 88 हजार रुपये निकाले थे। उनका डेबिट कार्ड बदल दिया था। जांच साइबर सेल और थाने की पुलिस कर रही थी। जांच में सामने आया कि पेटीएम मशीन (ईडीसी) के माध्यम से डेबिट कार्ड से रकम खातों में ट्रांसफर की गई। खातों की जानकारी ली गई और मामला पकड़ में आया। साइबर सेल की जांच टीम मेें निरीक्षक सुल्तान सिंह, सिपाही विजय तोमर सहित अन्य शामिल थे।
फर्जी दस्तावेज से खोले गए खाते
पुलिस की जांच में पता चला कि फर्जी दस्तावेज से खाते खोले गए थे। रकम कुछ ही देर में एटीएम से निकाल ली गई थी। इस पर पुलिस ने पेटीएम मशीन के संचालक की जानकारी कंपनी से ली। पता चला कि मशीन जिन लोगों को दी गई, उनकी आईडी फर्जी है। इसे कंपनी के कर्मचारी ने बेचा था। सत्यापन नहीं किया गया था। पुलिस ने आरोपी कर्मचारी सतीश कुमार का पकड़ लिया। वह हरियाणा के महेंद्रगढ़ का है। वर्तमान में गुरुग्राम में रह रहा था। कंपनी ने अब उसे नौकरी से निकाल दिया है। आरोपी सतीश ने पूछताछ में बताया कि उसने गैंग को मशीनें बेची थीं। हरियाणा के मेवात निवासी इमरान और गुरुग्राम निवासी जुनैद के नाम बताए हैं। इनको भी मशीन बेची गई थी।