कासगंज। शहर में लोहे की नुकीला, लोहे के भारी पाइप, गाटर एवं लोहे की तेज धार की चादर लेकर ई- रिक्शा, ऑटो व ट्रैक्टर आदि वाहन भीड़ भरे बाजार में गुजरते है। जिससे हादसा होने की आशंका बनी रहती है। लाल रंग का कपड़ा या अन्य कोई ऐसा सिग्नल भी नहीं होता जिससे उनका अंदाजा लगाया जा सके। दूसरे वाहन चालकों के लिए काफी दिक्कतों भरा रहता है। इस ओर यातायात पुलिस का भी ध्यान नहीं जाता।
एक सप्ताह पूर्व एक महिला लोहे की चादर से लदे हुए ई रिक्शा की चपेट में आ गई। जिससे उसके पैर में चोट आई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। असुरक्षित रूप से ऑटो, ई- रिक्शा, ट्रैक्टर व अन्य वाहनों में भारी लोहे की सरियां, गाटर, पाइप एवं प्लाई वुड आदि ले जाए जाते है। ये कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इनको लेकर पड़ताल की गई तो बाजार में असुरक्षित रूप से ई -रिक्शा व अन्य वाहन सर्कुलर रोड आदि मार्गों से गुजरते मिले।
दृश्य - 1:
शहर के लक्ष्मीगंज से एक ट्रैक्टर लोहे की सरिया भरकर निकल रहा था। सरिया ट्रैक्टर से काफी बाहर की ओर निकली हुई थीं। हल्का सा अंधेरा होने पर पीछे आने वाहन चालक की जरा सी चूक हादसा का करण बन सकती है।
दृश्य - 2:
एक लोडर टेंपों स्टेट बैंक गली से गुजरते हुए जा रहा था, इस पर भी असुरक्षित रूप से लोहे की सरिया व गाटर लगे हुए थे। यदि ये गिर जाए तो पास से गुजर रहे लोगों की जान खतरे में आ सकती है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
दृश्य - 3:
एक ई- रिक्शा पर लोहे की चादर लादकर ले जाया जा रहा है। शहर के बाजार से गुजरते हुए यदि कोई चपेट में आ जाए तो वह गंभीर घायल हो सकता है। यह लापरवाही किसी पर भी भारी पड़ सकती है।
दृश्य - 4
हाथी दरवाजे के समीप खड़ा एक ई-रिक्शा में जिसमें लोहे की सरिया असुरक्षित तरीके से रखी हुई हैं। ई-रिक्शा गंतव्य के लिए तैयार हैँ, लेकिन सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। सरियों के आगे व पीछे कोई लाल रंग कपड़ा या चिन्ह नहीं है।
लोहे की सरिया, चादर, गाटर, पाइप आदि सामान को इस तरह से असुरक्षित ई-रिक्शा आदि में ले जाना प्रतिबंधित है। सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। इस पर रोक लगाई जाएगी और जागरूक किया जाएगा। - अशोक कुमार तोमर, यातायात प्रभारी।